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Shimla News: खून में अल्कोहल मिलने पर कंपनी क्लेम को नहीं कर सकती खारिज

Wed, 02 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:59 PM IST
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The company cannot reject the claim if alcohol is found in the blood.
राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सुनाया फैसला, एसबीआई जनरल इंश्योरेंस को देना होगा 20 लाख रुपये का मुआवजा
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सड़क हादसे में हो गई थी रामपुर के दुशांत की मौत
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी पैदल व्यक्ति की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हो जाती है, तो केवल उसके खून में शराब की पुष्टि होने के आधार पर बीमा कंपनी दुर्घटना क्लेम खारिज नहीं कर सकती।

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की पीठ ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें मृतक की मां को 20 लाख रुपये की बीमा राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया था। रामपुर (शिमला) के गांव सनारसा निवासी मनी देवी के बेटे दुशांत गौतम ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से 20 लाख रुपये की पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। इसकी अवधि 13 फरवरी 2019 से 12 फरवरी 2020 तक थी। एक दिसंबर 2019 को भावानगर (निचार)
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क्षेत्र में सड़क पर पैदल चलते समय दुशांत को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। इस संबंध में पुलिस थाना भावानगर (निचार) में एफआईआर भी दर्ज की थी।
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हादसे के बाद जब मां मनी देवी (नॉमिनी) ने 20 लाख रुपये के क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने 8 अक्तूबर 2020 को क्लेम निरस्त कर दिया। कंपनी का तर्क था कि फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट के अनुसार के दुशांत के खून में 299.73 मिलीग्राम अल्कोहल पाया गया था। कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों और एक्सक्लूजन क्लॉज का हवाला देते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया था। परेशान होकर मनी देवी ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला का दरवाजा खटखटाया। जिला आयोग ने 13 नवंबर 2024 को फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया था कि वह शिकायतकर्ता को 20 लाख रुपये की क्लेम राशि, शिकायत दर्ज करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अतिरिक्त 50 हजार रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए थे।



दलीलें सुनने के बाद आयोग ने सुनाया फैसला
राज्य उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि दुशांत वाहन नहीं चला रहा था बल्कि वह पैदल चल रहा था और उसे किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी थी। केवल रिपोर्ट में अल्कोहल मिलने से यह साबित नहीं होता कि दुर्घटना शराब के सेवन के कारण हुई थी। आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनी शराब के सेवन और हादसे के बीच कोई सीधा संबंध साबित करने में विफल रही है। ऐसे में क्लेम खारिज करना सेवा में कोताही है। राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।
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