{"_id":"6a8c35a51554748a0409904e","slug":"the-borrower-will-have-to-repay-the-bank-loan-even-if-the-goods-are-not-received-shimla-news-c-19-sml1002-775221-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: सामान न मिलने पर भी कर्जदार \nको चुकाना होगा बैंक का ऋण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: सामान न मिलने पर भी कर्जदार को चुकाना होगा बैंक का ऋण
विज्ञापन
ऋण पर खरीदी थी मशीन की नहीं हुई थी आपूर्ति
ऋणकर्ता ने दिया था तर्क, मशीन न मिलने पर ऋण देने को बाध्य नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। यदि कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेकर सामान या मशीनरी खरीदता है और आपूर्तिकर्ता सामान की डिलीवरी नहीं करता है, तो भी कर्जदार अपनी ऋण की देनदारी से नहीं बच सकता। यह बात सिविल जज ज्योति भगचंदानी की अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) द्वारा दायर रिकवरी सूट का निपटारा करते हुए कही।
मामले के अनुसार शिमला निवासी रोहित कुमार ने पेपर प्लेट बनाने की मशीन खरीदने के लिए अगस्त 2018 में एसबीआई से 1,65,000 रुपये का ऋण लिया था। बैंक के नियमानुसार ऋण की राशि सीधे सप्लायर फर्म मैसर्स आरबी ए टू जेड कंपनी सोलन के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। प्रतिवादी कर्जदार ने कोर्ट में तर्क दिया कि ऋण की रकम मिलने के बावजूद सप्लायर फर्म ने उसे मशीन की डिलीवरी नहीं दी, जिसके कारण उसने पुलिस में शिकायत भी की थी। उसने दावा किया कि जब उसे मशीन मिली ही नहीं तो वह ऋण चुकाने के लिए बाध्य नहीं है अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद कहा कि बैंक और कर्जदार के बीच का संबंध एक अनुबंध पर आधारित है। बैंक केवल ऋणदाता है और उसका सप्लायर से कोई सीधा संबंध नहीं है।
यदि सप्लायर ने मशीन की आपूर्ति नहीं की है तो कर्जदार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यह बैंक का ऋण चुकाने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने एसबीआई के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी रोहित कुमार को 1,91,043.27 रुपये की बकाया राशि 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ बैंक को लौटाने के आदेश दिए हैं। यह ब्याज केस शुरू होने की तिथि से पूरी राशि का भुगतान होने तक देय होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऋणकर्ता ने दिया था तर्क, मशीन न मिलने पर ऋण देने को बाध्य नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। यदि कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेकर सामान या मशीनरी खरीदता है और आपूर्तिकर्ता सामान की डिलीवरी नहीं करता है, तो भी कर्जदार अपनी ऋण की देनदारी से नहीं बच सकता। यह बात सिविल जज ज्योति भगचंदानी की अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) द्वारा दायर रिकवरी सूट का निपटारा करते हुए कही।
मामले के अनुसार शिमला निवासी रोहित कुमार ने पेपर प्लेट बनाने की मशीन खरीदने के लिए अगस्त 2018 में एसबीआई से 1,65,000 रुपये का ऋण लिया था। बैंक के नियमानुसार ऋण की राशि सीधे सप्लायर फर्म मैसर्स आरबी ए टू जेड कंपनी सोलन के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। प्रतिवादी कर्जदार ने कोर्ट में तर्क दिया कि ऋण की रकम मिलने के बावजूद सप्लायर फर्म ने उसे मशीन की डिलीवरी नहीं दी, जिसके कारण उसने पुलिस में शिकायत भी की थी। उसने दावा किया कि जब उसे मशीन मिली ही नहीं तो वह ऋण चुकाने के लिए बाध्य नहीं है अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद कहा कि बैंक और कर्जदार के बीच का संबंध एक अनुबंध पर आधारित है। बैंक केवल ऋणदाता है और उसका सप्लायर से कोई सीधा संबंध नहीं है।
विज्ञापन
यदि सप्लायर ने मशीन की आपूर्ति नहीं की है तो कर्जदार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यह बैंक का ऋण चुकाने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने एसबीआई के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी रोहित कुमार को 1,91,043.27 रुपये की बकाया राशि 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ बैंक को लौटाने के आदेश दिए हैं। यह ब्याज केस शुरू होने की तिथि से पूरी राशि का भुगतान होने तक देय होगा।
विज्ञापन