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Shimla News: गेयटी में श्रीराम की स्तुति से माहौल हुआ भक्तिमय
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रसिका श्रृंगार रस में प्रस्तुतियों ने बांधा समां
शास्त्रीय गायन में की प्रस्तुति ने धनाश्री ने बटोरी वाहवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय की ओर से गेयटी थियेटर में रसिका-श्रृंगार रस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी के अंतिम दिन हुआ जिसमें कला और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत श्रीराम स्तुति पर आधारित नृत्य से हुई जिसने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद सितार वादन में राग मालकौंस और तबला वादन में रूपक ताल की प्रस्तुति ने दर्शकों की सराहना हासिल की। शास्त्रीय गायन में राग पूरिया धनाश्री की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह प्रस्तुति में सात सुरों पर आधारित संगीत, वादन और नृत्य का समन्वय देखने को मिला। गजल गायन में सुजल ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से प्रभाव छोड़ा। वहीं ठंडी-ठंडी हिमाचली सड़कों ...लोकगीत के माध्यम से क्षेत्रीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की गई। सितार समूह की प्रस्तुति में पाश्चात्य धुनों का मिश्रण भी विशेष आकर्षण रहा। पश्चिमी बांसुरी वादन और तराना नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ऊर्जा बनाए रखी।कार्यक्रम में सतवंत अटवाल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. कमायनी बिष्ट ने की। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्वलन से हुई।
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शास्त्रीय गायन में की प्रस्तुति ने धनाश्री ने बटोरी वाहवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जवाहर लाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय की ओर से गेयटी थियेटर में रसिका-श्रृंगार रस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी के अंतिम दिन हुआ जिसमें कला और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत श्रीराम स्तुति पर आधारित नृत्य से हुई जिसने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद सितार वादन में राग मालकौंस और तबला वादन में रूपक ताल की प्रस्तुति ने दर्शकों की सराहना हासिल की। शास्त्रीय गायन में राग पूरिया धनाश्री की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह प्रस्तुति में सात सुरों पर आधारित संगीत, वादन और नृत्य का समन्वय देखने को मिला। गजल गायन में सुजल ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से प्रभाव छोड़ा। वहीं ठंडी-ठंडी हिमाचली सड़कों ...लोकगीत के माध्यम से क्षेत्रीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की गई। सितार समूह की प्रस्तुति में पाश्चात्य धुनों का मिश्रण भी विशेष आकर्षण रहा। पश्चिमी बांसुरी वादन और तराना नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ऊर्जा बनाए रखी।कार्यक्रम में सतवंत अटवाल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. कमायनी बिष्ट ने की। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्वलन से हुई।
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