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Shimla News: गेयटी के आदि बाजार में कश्मीरी कहवा की खुशबू से गरमाहट
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नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने किया शुभारंभ, चंबा की चुख और किन्नौर का ब्लैक जीरा भी बिक रहा
जनजातीय वस्त्र और आभूषण भी आदि बाजार में उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के गेयटी थियेटर के बहुउद्देशीय हॉल में शुक्रवार को आदि बाजार शुरू हो गया। इसका उद्घाटन नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने किया। यह कार्यक्रम जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
चंबा की चुख (खट्टास) को देखकर जहां मुंह में पानी भर जा रहा है वहीं कश्मीरी कहवा की खुशबू कड़ाके की सर्दी में गरमाहट भर रही है। भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल के उत्सव के रूप में आयोजित इस प्रदर्शनी में देशभर से आदिवासी उत्पाद बिक्री के लिए रखे गए हैं। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 25 जनजातीय शिल्पकारों ने हिस्सा लिया। इनमें राजस्थान, उत्तर-पूर्वी राज्यों, गुजरात, मध्य प्रदेश, प्रदेश और लेह–लद्दाख के शिल्पकार शामिल हैं। प्रदर्शनी में लोगों के लिए विभिन्न श्रेणियों के खास और प्रामाणिक उत्पाद रखे हैं। इनमें चंबा रुमाल, चंबा चुख, मणिपुरी ब्लैक राइस, कश्मीरी कहवा, किन्नौर का ब्लैक जीरा, लाहौरी हस्त निर्मित उत्पाद, राजस्थानी मीनाकारी शिल्प सहित जनजातीय वस्त्र, आभूषण और प्राकृतिक उत्पाद शामिल हैं।
कार्यक्रम का संचालन विकास रायजादा के नेतृत्व में और उपप्रबंधक ट्राइफेड उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय हिमांशु बहल के सहयोग से किया जा रहा है। जेसीए एडमिनिस्ट्रेशन डिविजन के दीपक सिंह गुलिया ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देना और जनजातीय समुदायों को बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी न केवल देश की आदिवासी परंपराओं और कला का प्रदर्शन करती है बल्कि न्यायसंगत व्यापार एवं प्रत्यक्ष भागीदारी के माध्यम से जनजातीय आजीविका को सुदृढ़ बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
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जनजातीय वस्त्र और आभूषण भी आदि बाजार में उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के गेयटी थियेटर के बहुउद्देशीय हॉल में शुक्रवार को आदि बाजार शुरू हो गया। इसका उद्घाटन नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने किया। यह कार्यक्रम जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राइफेड) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
चंबा की चुख (खट्टास) को देखकर जहां मुंह में पानी भर जा रहा है वहीं कश्मीरी कहवा की खुशबू कड़ाके की सर्दी में गरमाहट भर रही है। भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल के उत्सव के रूप में आयोजित इस प्रदर्शनी में देशभर से आदिवासी उत्पाद बिक्री के लिए रखे गए हैं। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 25 जनजातीय शिल्पकारों ने हिस्सा लिया। इनमें राजस्थान, उत्तर-पूर्वी राज्यों, गुजरात, मध्य प्रदेश, प्रदेश और लेह–लद्दाख के शिल्पकार शामिल हैं। प्रदर्शनी में लोगों के लिए विभिन्न श्रेणियों के खास और प्रामाणिक उत्पाद रखे हैं। इनमें चंबा रुमाल, चंबा चुख, मणिपुरी ब्लैक राइस, कश्मीरी कहवा, किन्नौर का ब्लैक जीरा, लाहौरी हस्त निर्मित उत्पाद, राजस्थानी मीनाकारी शिल्प सहित जनजातीय वस्त्र, आभूषण और प्राकृतिक उत्पाद शामिल हैं।
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कार्यक्रम का संचालन विकास रायजादा के नेतृत्व में और उपप्रबंधक ट्राइफेड उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय हिमांशु बहल के सहयोग से किया जा रहा है। जेसीए एडमिनिस्ट्रेशन डिविजन के दीपक सिंह गुलिया ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देना और जनजातीय समुदायों को बाजार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी न केवल देश की आदिवासी परंपराओं और कला का प्रदर्शन करती है बल्कि न्यायसंगत व्यापार एवं प्रत्यक्ष भागीदारी के माध्यम से जनजातीय आजीविका को सुदृढ़ बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
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