सरकारी स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही अफसरशाही की लेटलतीफी
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सरकारी स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों पर अफसरशाही की लेटलतीफी भारी पड़ रही है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से जमा दो तक पढ़ने वाले नौ लाख से अधिक विद्यार्थियों को स्मार्ट वर्दी देने के टेंडर कैबिनेट मंजूरी के 24 दिन बाद भी नहीं हो सके हैं।
लाखों विद्यार्थियों पर अफसरशाही की लेटलतीफी भारी पड़ रही है। इस साल से सरकारी स्कूलों में वर्दी का रंग बदला जाना है। 27 मार्च को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्मार्ट वर्दी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लड़कों को ग्रीन और लड़कियाें को चॉकलेट रंग की स्मार्ट ड्रेस देने का कैबिनेट ने फैसला लिया है। सभी विद्यार्थियों को वर्दी के दो-दो सेट दिए जाने हैं।
यहां जानिए स्मार्ट वर्दी का मामला
पहली से दसवीं तक के विद्यार्थियों को वर्दी की सिलाई के लिए दो सौ रुपये दिए जाएंगे जबकि ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को वर्दी सिलवाने का खर्च स्वयं वहन करना होगा। सरकार से मंजूर हुए प्रस्ताव के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लड़कों की ग्रीन रंग की पैंट और ग्रीन रंग की चेक शर्ट होगी।
लड़कियों को चॉकलेट रंग की चेक कमीज और चॉकलेट रंग की सलवार होगी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू की मुख्यमंत्री वर्दी योजना का नाम भी बदल दिया गया है। भाजपा सरकार ने स्मार्ट वर्दी देते हुए योजना का नाम बदलकर अटल वर्दी योजना कर दिया है।
लेकिन अफसरों की देरी के चलते अभी तक वर्दी खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उधर, सिविल सप्लाई कारपोरेशन के निदेशक एसएस गुलेरिया ने बताया है कि जल्द ही स्मार्ट वर्दी को लेकर हाई पॉवर कमेटी की बैठक होगी। इसके बाद टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि संभावित है कि अगले सप्ताह टेंडर प्रक्रिया को शुरू कर लिया जाएगा।