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Shimla News: कान्हा के स्वागत के लिए रंग बिरंगी लाइटों से सजे देवालय
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आधी रात को कपाट खुलते ही होंगे मुरली वाले के दर्शन
मंदिरों में रातभर होंगे भजन-कीर्तन, पंचामृत से होगा अभिषेक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला जन्माष्टमी पर्व को लेकर सज चुकी है। कान्हा के स्वागत में भक्त जुटे हुए हैं। शहर के सभी मंदिरों में सजावट के साथ ही लड्डू गोपाल के लिए झूले की मनमोहक सजावट की है।
पंचामृत से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया जाएगा। रात 12 बजे कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होंगे। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार को जन्माष्टमी के रूप में मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। अष्टमी तिथि पर अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के संयोग से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हर्षण योग का विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत और पूजा फलदायी होती है। गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि अष्टमी तिथि पर मध्यरात्रि 12:00 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए रात के समय पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य को सौ जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही व्रत को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होने के साथ उत्तम योनि में जन्म मिलता है।
रोहिणी नक्षत्र में होगी पूजा
पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि अष्टमी तिथि 3 सितंबर की रात 2:26 बजे से शुरू होकर 4 सितंबर को रात 12:14 बजे तक रहेगी जबकि रोहिणी नक्षत्र रात 11:05 बजे तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और विशेष पूजन का शुभ मुहूर्त रात 11:57 से 12:43 बजे तक रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु बाल गोपाल का अभिषेक, पूजन और आरती कर जन्मोत्सव मनाएंगे। व्रत का पारण 5 सितंबर की सुबह किया जाएगा।
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मंदिरों में रातभर होंगे भजन-कीर्तन, पंचामृत से होगा अभिषेक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला जन्माष्टमी पर्व को लेकर सज चुकी है। कान्हा के स्वागत में भक्त जुटे हुए हैं। शहर के सभी मंदिरों में सजावट के साथ ही लड्डू गोपाल के लिए झूले की मनमोहक सजावट की है।
पंचामृत से भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया जाएगा। रात 12 बजे कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होंगे। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार को जन्माष्टमी के रूप में मनाई जाएगी। जन्माष्टमी पर इस साल भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। अष्टमी तिथि पर अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के संयोग से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हर्षण योग का विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत और पूजा फलदायी होती है। गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि अष्टमी तिथि पर मध्यरात्रि 12:00 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए रात के समय पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी का व्रत रखने से मनुष्य को सौ जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही व्रत को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होने के साथ उत्तम योनि में जन्म मिलता है।
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रोहिणी नक्षत्र में होगी पूजा
पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि अष्टमी तिथि 3 सितंबर की रात 2:26 बजे से शुरू होकर 4 सितंबर को रात 12:14 बजे तक रहेगी जबकि रोहिणी नक्षत्र रात 11:05 बजे तक रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और विशेष पूजन का शुभ मुहूर्त रात 11:57 से 12:43 बजे तक रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु बाल गोपाल का अभिषेक, पूजन और आरती कर जन्मोत्सव मनाएंगे। व्रत का पारण 5 सितंबर की सुबह किया जाएगा।
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