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हिमाचल में किसानों से खेल: 10 हजार की सब्सिडी के लिए 7,500 ज्यादा देकर खरीदना पड़ रहा ब्रश कटर, जानें
Sun, 06 Sep 2026 10:02 AM IST
Ankesh Dogra
सुरेश शांडिल्य, शिमला।
सुरेश शांडिल्य, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 06 Sep 2026 10:02 AM IST
सार
कृषि उपकरणों पर सब्सिडी योजना में बाजार और सरकारी स्वीकृत कीमतों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। बाजार में 12,500 रुपये का ब्रश कटर सब्सिडी के लिए करीब 20 हजार रुपये में खरीदना पड़ रहा है। यानी 10 हजार की सब्सिडी के लिए किसान को करीब 7,500 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं। पावर वीडर की कीमतों में भी हजारों का अंतर बताया गया है। कृषि विभाग ने मामले की पड़ताल का भरोसा दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : AI
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विस्तार
किसानों को कृषि उपकरणों पर राहत देने के लिए शुरू की गई अनुदान योजना में उनके साथ बड़ा खेल हो रहा है। 10 हजार की सब्सिडी के लिए किसान को बाजार कीमत से 7,500 रुपये ज्यादा देकर ब्रश कटर खरीदना पड़ रहा है। बाजार में ब्रश कटर 12,500 रुपये में मिल रहा है, लेकिन सब्सिडी के लिए इसे 20 हजार रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
किसान को सब्सिडी के लिए पहले ही 7,500 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं। यही नहीं, अलग-अलग कंपनियों के पावर वीडर्स में भी बाजार कीमत और पोर्टल पर मंजूर सरकारी कीमत में हजारों का अंतर है। किसान मर्जी से बाजार रेट पर उपकरण खरीदकर सब्सिडी का लाभ नहीं ले सकता। उसे पहले पोर्टल पर आवेदन करना होता है और स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार ही उपकरण खरीदना पड़ता है।
बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध उपकरण और सब्सिडी के लिए तय कीमत में अंतर होने से किसान के सामने अधिक कीमत पर उपकरण खरीद की मजबूरी बन रही है। जीएसटी के कारण बिल और बढ़ने का भी असर पड़ रहा है। शिमला के एक अन्य विक्रेता ने बताया कि दो हॉर्स पावर का होंडा एफ-300 बेस मॉडल का पावर वीडर बाजार में करीब 48 हजार रुपये में उपलब्ध है। सब्सिडी लेने के लिए इसे 55,488 रुपये में खरीदना होगा। इस कीमत पर बिल बनने के साथ जीएसटी का भुगतान भी करना होगा। ऐसे में किसान को बाजार कीमत से हजारों रुपये ज्यादा देने पड़ रहे हैं।
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किसान को सब्सिडी के लिए पहले ही 7,500 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं। यही नहीं, अलग-अलग कंपनियों के पावर वीडर्स में भी बाजार कीमत और पोर्टल पर मंजूर सरकारी कीमत में हजारों का अंतर है। किसान मर्जी से बाजार रेट पर उपकरण खरीदकर सब्सिडी का लाभ नहीं ले सकता। उसे पहले पोर्टल पर आवेदन करना होता है और स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार ही उपकरण खरीदना पड़ता है।
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बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध उपकरण और सब्सिडी के लिए तय कीमत में अंतर होने से किसान के सामने अधिक कीमत पर उपकरण खरीद की मजबूरी बन रही है। जीएसटी के कारण बिल और बढ़ने का भी असर पड़ रहा है। शिमला के एक अन्य विक्रेता ने बताया कि दो हॉर्स पावर का होंडा एफ-300 बेस मॉडल का पावर वीडर बाजार में करीब 48 हजार रुपये में उपलब्ध है। सब्सिडी लेने के लिए इसे 55,488 रुपये में खरीदना होगा। इस कीमत पर बिल बनने के साथ जीएसटी का भुगतान भी करना होगा। ऐसे में किसान को बाजार कीमत से हजारों रुपये ज्यादा देने पड़ रहे हैं।
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सब्सिडी चाहिए तो महंगा खरीदना पड़ेगा
रामपुर के एक कारोबारी से किसान बनकर जब ब्रश कटर की कीमत पूछी गई तो उन्होंने साफ कहा कि यदि सब्सिडी लेनी है तो उपकरण महंगा खरीदना पड़ेगा। नहीं लेनी है तो फिर रेट कम हो जाएगा। एस ट्रेडर्स क्रॉपमेट कंपनी का सीएमटी-40 बीसी मॉडल बाजार में करीब 12,500 रुपये में उपलब्ध है। वहीं, सब्सिडी के लिए इसी मॉडल का करीब 20 हजार रुपये का बिल बनाना होगा। 20 हजार रुपये के बिल पर किसान को 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। वह भी मालूम नहीं कब मिलेगी। उसके लिए लंबा इंतजार है।
सरकारी-बाजार रेट में इतना अंतर कैसे आ रहा है, इसकी पड़ताल की जाएगी। किसी किसान के पास बिल हैं तो उपलब्ध करवाएं। कंपनियों को विभाग ने सूचीबद्ध किया है। सब्सिडी का पोर्टल केंद्र सरकार का है। किसानों को उपदान का लाभ मिलना चाहिए। -डॉ. रवींद्र सिंह जसरोटिया, निदेशक राज्य कृषि विभाग
रामपुर के एक कारोबारी से किसान बनकर जब ब्रश कटर की कीमत पूछी गई तो उन्होंने साफ कहा कि यदि सब्सिडी लेनी है तो उपकरण महंगा खरीदना पड़ेगा। नहीं लेनी है तो फिर रेट कम हो जाएगा। एस ट्रेडर्स क्रॉपमेट कंपनी का सीएमटी-40 बीसी मॉडल बाजार में करीब 12,500 रुपये में उपलब्ध है। वहीं, सब्सिडी के लिए इसी मॉडल का करीब 20 हजार रुपये का बिल बनाना होगा। 20 हजार रुपये के बिल पर किसान को 10 हजार रुपये की सब्सिडी मिलेगी। वह भी मालूम नहीं कब मिलेगी। उसके लिए लंबा इंतजार है।
सरकारी-बाजार रेट में इतना अंतर कैसे आ रहा है, इसकी पड़ताल की जाएगी। किसी किसान के पास बिल हैं तो उपलब्ध करवाएं। कंपनियों को विभाग ने सूचीबद्ध किया है। सब्सिडी का पोर्टल केंद्र सरकार का है। किसानों को उपदान का लाभ मिलना चाहिए। -डॉ. रवींद्र सिंह जसरोटिया, निदेशक राज्य कृषि विभाग