प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम जिलों में टेलीमेडिसिन से इलाज शुरू
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प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम जिलों किन्नौर और लाहौल-स्पीति में टेलीमेडिसिन से उपचार शुरू हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन इलाकों में बरसों पहले टेलीमेडिसिन सेवा शुरू करने की कवायद चलाई थी। शुरुआती प्रयोग भी हुए, लेकिन अब फिर से उपचार टेलीमेडिसिन की मदद से मरीजों का उपचार शुरू हो गया है। इससे मरीजों को गंभीर बीमारी होने पर भी चंडीगढ़ या फिर दिल्ली के चक्कर नहीं काटने होंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के किन्नौर और केलांग की पीएचसी में वीडियो कांफ्रेंस के जरिये मरीजों की जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए विशेष दिन चयनित किए गए हैं। इस तकनीक के तहत संबंधित एरिया की पीएचसी में बैठकर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ से मरीज की बीमारी के बारे पूछा जाता है।
मौके पर ही उनके टेस्ट और अन्य तरह की दिक्कतों को भी विशेषज्ञ तक पहुंचाया जाता है। केलांग और किन्नौर इलाके बर्फबारी के कारण महीनों बंद रहते हैं। कुछ क्षेत्रों में तो 12 महीने बर्फ रहती है। ऐसे में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए टेलीमेडिसिन पर्वतीय इलाकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
टेलीमेडिसिन की ट्रेनिंग ले चुके स्वास्थ्य विभाग बिलासपुर के एमओएच डॉ. परविंद्र सिंह ने बताया कि टेलीमेडिसिन से उपचार शुरू हो गया है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया जा रहा है। कुछ मरीजों के उपचार में इस सेवा का इस्तेमाल हो भी चुका है। हिमाचल में केलांग और किन्नौर पीएचसी में इसे शुरू किया गया है।
यह है टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट
टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट सिर्फ संबंधित एरिया की पीएचसी में ही दी जाएगी। इसके लिए चिकित्सक को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। अगर कोई मरीज गंभीर बीमारी से ग्रस्त आता है तो चिकित्सक उसकी रिपोर्ट तैयार कर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में तैनात एक्सपर्ट से इसकी सलाह लेता है। विशेषज्ञों की सलाह के साथ स्थानीय अस्पताल में ही इलाज किया जा सकता है।