शिक्षक दिवस: दिव्यांगता की चुनौती लांघ शिक्षा की अलख जला रहे पीआर सैणी
शारीरिक अक्षमता के बावजूद बाल स्कूल मंडी में साधारण छात्र बनकर 1980 में दसवीं पास की। संघर्ष भरे जीवन में चंडीगढ़ डीएवी में एमकॉम की और उसी स्कूल में प्रवक्ता का पदभार संभाला। बाद में अपनी लगन और सरकारी स्कूल में शिक्षा का गुणवत्ता पर काम करते हुए पीआर सैणी वर्तमान में ब्वॉयज स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। सुबह और शाम के समय जरूरतमंद बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाने के साथ छात्रों में आत्मविश्वास की अलख जगाने में भी वे एक मिसाल हैं।
इस सरकारी स्कूल से न केवल विद्यार्थी नीट पास कर डॉक्टर बने हैं, बल्कि जेईईई क्लीयर कर आईआईटी में देश का भावी वैज्ञानिक बनने की तरफ अग्रसर हैं। कई विद्यार्थी सीए, प्रवक्ता, बैंक मैनेजर, कुशल उद्यमी और राजनीतिज्ञ के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में ही विद्यालय के छात्र निखिल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिला।
विशेष ऑटो में करते हैं सफर
सैणी के दोनों पांव काम नहीं करते। वह बैसाखियों के सहारे चलते हैं। विद्यालय में 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। प्रार्थना सभा में छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय का संचालन 8 : 55 से किया जाता है। वे खुद सब निरीक्षण करते हैं। उन्होंने विशेष ऑटो बनाया है, जिसे वह खुद चलाकर हर प्रोग्राम का हिस्सा बनते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में अग्रसर रहते हैं।
बेटे ने अमेरिका में ली न्यूरोसाइंस मास्टर्स की डिग्री, बेटी शिक्षिका
स्कूली बच्चों को संघर्ष की राह में कभी न हारने का मंत्र देने वाले पीआर सैणी ने अपने बेटे को प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से ही पढ़ाई करवाई। बोर्ड परीक्षाओं में दो बार मेरिट सूची में बेटे ने जगह बनाई। उसके पश्चात उसने गांधीनगर से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की और सिल्वर मेडल जीता।
फिर टेक्निकल यूनिवर्सिटी म्यूनिख (जर्मनी) और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से न्यूरोसाइंस में मास्टर्स की शिक्षा पूर्ण की। आज वह एक मल्टी नेशनल कंपनी में सीनियर एजूकेशनल एनालिस्ट स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। एक बेटी शिक्षिका बनकर छात्रों का भविष्य संवार रही है।