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नोटिस बोर्ड पर फोटो लगाने से शिक्षकों को ऐतराज, शिक्षा विभाग के फैसले का किया विरोध

Tue, 12 Sep 2017 09:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 12 Sep 2017 09:07 PM IST
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teacher association opposed the decision of education department

पहली से आठवीं कक्षा तक के शिक्षकों के स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर फोटो लगाए जाने के आदेशों पर शिक्षक संघों ने ऐतराज जताया है। राजकीय अध्यापक संघ और प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के इस फैसले को लेकर अपना विरोध जताया है। शिक्षक संघों का कहना है कि अगर स्कूलों में शिक्षकों की सब्लेटिंग चल रही है तो यह विभागीय अधिकारियों की सबसे बड़ी नाकामी है।

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राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का कहना है कि विभाग अपनी नाकामियों और गलतियों को छिपाने के लिए शिक्षकों के सम्मान से खिलवाड़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि निदेशालय डेपुटेशन के नाम पर चहेतों को लाभ दे रहा है। अगर कोई शिक्षक उस स्कूल में तैनात नहीं है, जहां उसे भेजा गया है तो यह अफसरशाही की नाकामी है। इस तरह के कुछ मामलों के लिए सभी शिक्षकों को दोषी ठहराया जाना गलत है। 
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उधर, प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष गुरचरण सिंह वेदी का कहना है कि कुछ शिक्षकों की गलती का खामियाजा पूरे प्रदेश के शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। सब्लेटिंग के बहुत कम मामले प्रदेश में है। इस तरह के मामलों को रोकने के लिए पूरे प्रदेश के शिक्षकों के फोटो नोटिस बोर्ड पर लगाने का फैसला लेना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस बाबत निदेशक मनमोहन शर्मा से मुलाकात कर अपना विरोध भी जताया।

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प्राथमिक शिक्षकों ने टाली भूख हड़ताल

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राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने मंगलवार से प्रस्तावित भूख हड़ताल को टाल दिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा के साथ बैठक करने के बाद संघ ने भूख हड़ताल को टालने का फैसला लिया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष गुरचरण सिंह बेदी ने बताया कि मांगों को लेकर चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। निरीक्षण सेल का गठन करना सरकार का बहुत बड़ा काम है। शिक्षा के गुणात्मक सुधार के प्रति सरकार की सकारात्मक सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए हर खंड के लिए एक अलग खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी नियुक्त होना चाहिए। 

उन्होंने बताया कि निदेशक ने इस मुद्दे पर सहमति जता दी है। खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी के पद को द्वितीय श्रेणी अराजपत्रित करने के लिए कार्मिक विभाग को भेज दिया है। बीईईओ, सीएचटी, एचटी की पदोन्नति को प्लेसमेंट न करके नियमित पदोन्नति को उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में नियमित किया जाएगा। इसके अलावा कई अन्य मांगों को लेकर भी बैठक में सहमति बनी। बैठक में संघ के महासचिव रंजीत गुलेरिया, कोषाध्यक्ष कृष्ण पाल, सुरेश कंवर, संजय, प्रेम ठाकुर, रमेश विजलवान, जगदीश शर्मा, बलविंद्र सिंह, देसराज, सुखदर्शन और सुभाष सैनी मौजूद रहे।

ग्रामीण विद्या उपासकों के लिए खुशखबरी

teacher association opposed the decision of education department

प्रदेश की प्राथमिक पाठशालाओं में कार्यरत ग्रामीण विद्या उपासकों और एजूकेशन गारंटी स्कीम के तहत नियुक्त ग्रामीण विद्या उपासकों को सरकार ने बड़ा तोहफा ‌‌दिया है।  ग्रामीण विद्या उपासकों के मानदेय में सरकार ने चार हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। 

करीब 160 अध्यापकों को अब 15 हजार रुपये प्रति महीना मेहनताना दिया जाएगा। उधर, अखिल भारतीय अस्थाई अध्यापक महासंघ ने मानदेय बढ़ोतरी के लिए सरकार का आभार जताया है। एजूकेशन गारंटी स्कीम के प्रदेश अध्यक्ष जिया लाल ने सरकार से सभी ईजीएस अध्यापकों को ग्रामीण विद्या उपासकों की तर्ज पर जल्द नियमित करने की मांग की है। 

उन्होंने बताया कि साल 2009 में यह वर्ग 72 दिन के अनशन के बाद ईजीएस वर्ग से ग्रामीण विद्या उपासक (ईजीएस) वर्ग में परिवर्तित किए गए थे। इन्हें 3000 प्रति महीना दिया गया उसके बाद कुछ सालों के बाद 7000, फिर, 8900 और वर्तमान में 11160 किया गया।

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