बारालाचा में फंसे 85 पर्यटकों के लिए फरिश्ता बने टैंकर-ट्रक चालक
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बारालाचा में सैर-सपाटे के लिए आए 85 पर्यटक 22 सितंबर को ताउम्र याद रखेंगे। छह फुट बर्फ की ऊंची दीवारों के बीच रात के घने अंधेरे और अंजान सुनसान जगह पर किसी का भी हौसला टूट जाए पर इनके लिए टैंकर-ट्रक चालक फरिश्ता बनकर पहुंच गए।
22 से 26 सितंबर तक इन पर्यटकों ने अपनी गाड़ियों में दिन और रातें गुजारीं पर चालकों ने इनका हौसला नहीं टूटने दिया। दो वक्त मुफ्त खाने का बंदोबस्त कर चालकों ने इंसानियत का परिचय दिया।
ये लोग लेह से मनाली सैर सपाटे के लिए निकले थे। लेह की तरफ सामान लेकर जा रहे करीब 16 ट्रक और तेल से भरे छह टैंकरों के चालकों ने इनकी मदद की।
खुद पहुंचे, अब बच्चों की चिंता
वीरवार को बारालाचा से वायुसेना के हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किए गए लुधियाना के राजकुमार और फरीदाबाद से आए धनंजय कुमार ने कहा कि लेह से आते वक्त उनके पास पानी, मैगी व बिस्कुट के कुछ पैकेट जरूर थे लेकिन छह फुट बर्फ के बीच उनकी जो सेवा टैंकर व ट्रक चालकों ने की, वह इसे उम्र भर नहीं भूलेंगे।
देहरादून के अनिल, विनोद तथा बिट्टू ने कहा कि वे 22 सितंबर से बारालाचा में फंसे रहे। उन्होंने एयरलिफ्ट करने के लिए वायुसेना, प्रशासन और पुलिस का आभार भी जताया है। लुधियाना की अमिता वर्मा ने रोते हुए कहा कि उनका बेटा व बेटी अभी बारालाचा में फंसे हैं।
उन्होंने कहा कि वहां हालात बहुत ही खराब हैं। कुल्लू पहुंचे राजकुमार ने कहा कि उन्हें अपने बेटे-बेटी के साथ अन्य साथियों की चिंता सताने लगी है। बारालाचा में कई पर्यटक वाहन, टैक्सियां, ट्रक और टैंकर फंसे हुए हैं।