हिमाचल विधानसभा: 2,035 संस्थान बंद करने के मुद्दे पर तपा सदन, सत्ता पक्ष और विपक्ष में नोकझोंक
संस्थानों को बंद करने, विलय करने और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच हुई सीधी बहस ने सदन का तापमान बढ़ा दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को पहले ही सवाल पर करीब आधे घंटे तक सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच खूब नोकझोंक हुई। संस्थानों को बंद करने, विलय करने और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं के बीच हुई सीधी बहस ने सदन का तापमान बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि फैसले नीतिगत हैं, व्यक्तिगत नहीं। गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना सरकार का लक्ष्य है। इस पर नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार के पांच साल में लिए गए हर फैसले की समीक्षा की जाएगी।
मंगलवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता विपक्ष, विधायक रणधीर शर्मा और त्रिलोक जम्वाल ने संयुक्त सवाल के माध्यम से सरकार से पिछले तीन वर्षों में विभिन्न विभागों के संस्थानों को बंद, विलय या डिनोटिफाई करने और नए संस्थान खोलने का ब्योरा मांगा। जवाब में मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार के कार्यकाल पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने चुनावी लाभ लेने के लिए प्रदेशभर में संस्थानों की घोषणाओं की बाढ़ ला दी थी। कई जगह स्कूल, कॉलेज और स्वास्थ्य संस्थान तो खोल दिए गए, लेकिन न स्टाफ था, न भवन और न ही आवश्यक संसाधन। भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में सैकड़ों ऐसे शैक्षणिक संस्थान खोले, जहां शिक्षक तक उपलब्ध नहीं थे। वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालने के बाद इन फैसलों की समीक्षा की और जरूरत के आधार पर संस्थानों को चलाने की नीति अपनाई।
सुक्खू ने बताया कि 31 जुलाई 2025 तक सरकार ने 2,035 संस्थानों को डिनोटिफाई किया, जबकि 362 नए संस्थान खोले गए। 123 संस्थानों को दोबारा बहाल किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भाजपा या कांग्रेस देखकर फैसले नहीं लेती, बल्कि जहां जनता की वास्तविक जरूरत है, वहीं संस्थान खोले जाते हैं। उन्होंने संकेत दिए कि जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई और संस्थानों को मंजूरी दी जाएगी। इस पर जयराम ने सरकार को घेरते हुए कहा कि साढ़े तीन साल बाद इस प्रश्न का जवाब मिला है और वह भी अधूरा है। सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि 2,035 संस्थानों को बंद किया गया। यदि उनमें से 123 संस्थानों को फिर से खोलना पड़ा तो इसका मतलब है कि उन्हें बंद करने का फैसला ही गलत था। कांग्रेस सरकार लगातार राजनीतिक बदले की भावना से फैसले ले रही है। भाजपा सरकार ने जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर संस्थान खोले थे, लेकिन सत्ता बदलते ही उन्हें निशाना बनाया गया। नेता विपक्ष ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जब भाजपा दोबारा सत्ता में आएगी तो वर्तमान सरकार के पांच वर्षों के हर फैसले की समीक्षा की जाएगी।
रणधीर शर्मा ने उठाया तीन साल बाद पैदा हुई जरूरत का सवाल
विधायक रणधीर शर्मा ने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए सरकार को घेरा। कहा कि भाजपा सरकार के समय जलशक्ति विभाग का एक मंडल खोला गया था, जहां स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध थीं। कांग्रेस सरकार ने आते ही उसे बंद कर दिया, लेकिन तीन साल बाद उसी क्षेत्र के पास फिर नया मंडल खोल दिया गया। यह भी किराये के भवन में चल रहा है और स्टाफ पहले से कम है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या तीन साल बाद अचानक वहां जरूरत पैदा हो गई या फिर सरकार राजनीतिक लाभ के लिए फैसले ले रही है। भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा कि तीन साल में सरकार को यह तक समझ नहीं आया कि प्रदेश में वास्तविक जरूरत कहां है। विधायक हंसराज ने चंबा में बंद हुए संस्थानों का मामला उठाया।