{"_id":"6aec8c9e488fb5194506e0f8","slug":"tampering-with-university-autonomy-will-not-be-tolerated-union-shimla-news-c-19-sml1002-816262-2026-11-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता \nसे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं : संघ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं : संघ
विज्ञापन
राजभवन तक पैदल मार्च करेंगे कॉलेज शिक्षक, पूर्व शिक्षा मंत्री भारद्वाज और विधायक रणधीर ने उठाई आवाज
सभा में छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमा के सभागार में वीरवार को रोष सभा आयोजित की गई। शिक्षकों ने चेताया कि यदि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से छेड़छाड़ की गई तो शिक्षक समुदाय राजभवन तक पैदल मार्च करेगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (एचपीयूटीडब्ल्यूए) के तत्वावधान में आयोजित इस सभा में प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और गैर-शिक्षक कर्मचारी संगठनों ने हिस्सा लिया। सभा में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं एचपीयू के पूर्व छात्र सुरेश भारद्वाज और विधायक रणधीर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। पूर्व शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां बांटने वाली दुकानें नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, शोध और लोकतंत्र की आत्मा हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपनी शैक्षणिक नीतियों, शोध और संस्थागत निर्णयों में पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इस व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की गरिमा की पहचान है। प्रत्येक विश्वविद्यालय की अपनी अकादमिक परंपरा और अलग पहचान होती है। इसका संरक्षण जरूरी है। विश्वविद्यालय समुदाय की चिंताओं और विचारों को महत्व देते हुए इस विषय पर सार्थक संवाद होना चाहिए। सभा में प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में स्वायत्तता बहाल करने की मांग उठाई।
विज्ञापन
कार्यक्रम में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के संस्थापक कुलपति प्रो. देवदत्त शर्मा और एचपीयू एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. चंद्रमोहन परशीरा ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम, शोध और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े फैसले लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जोगिंदर सकलानी, डॉ. अंजलि शर्मा और डॉ. राजेश शर्मा ने किया। अंत में एचपीयूटीडब्ल्यूए के सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
सभा में छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमा के सभागार में वीरवार को रोष सभा आयोजित की गई। शिक्षकों ने चेताया कि यदि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से छेड़छाड़ की गई तो शिक्षक समुदाय राजभवन तक पैदल मार्च करेगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (एचपीयूटीडब्ल्यूए) के तत्वावधान में आयोजित इस सभा में प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और गैर-शिक्षक कर्मचारी संगठनों ने हिस्सा लिया। सभा में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं एचपीयू के पूर्व छात्र सुरेश भारद्वाज और विधायक रणधीर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। पूर्व शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां बांटने वाली दुकानें नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, शोध और लोकतंत्र की आत्मा हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपनी शैक्षणिक नीतियों, शोध और संस्थागत निर्णयों में पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इस व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की गरिमा की पहचान है। प्रत्येक विश्वविद्यालय की अपनी अकादमिक परंपरा और अलग पहचान होती है। इसका संरक्षण जरूरी है। विश्वविद्यालय समुदाय की चिंताओं और विचारों को महत्व देते हुए इस विषय पर सार्थक संवाद होना चाहिए। सभा में प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में स्वायत्तता बहाल करने की मांग उठाई।
विज्ञापन
कार्यक्रम में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के संस्थापक कुलपति प्रो. देवदत्त शर्मा और एचपीयू एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. चंद्रमोहन परशीरा ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम, शोध और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े फैसले लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जोगिंदर सकलानी, डॉ. अंजलि शर्मा और डॉ. राजेश शर्मा ने किया। अंत में एचपीयूटीडब्ल्यूए के सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया।