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गणतंत्र दिवस पर दिखेगी हिमाचल की 1000 साल पुरानी विरासत की झांकी

Fri, 12 Jan 2018 10:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, केलांग लाहौल-स्पीति
अमर उजाला ब्यूरो, केलांग लाहौल-स्पीति Updated Fri, 12 Jan 2018 10:17 AM IST
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tableau of key monastery will be displayed in republic day parade
कीह मठ

दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में इस बार भी हिमाचल की झांकी दिखेगी। गणतंत्र दिवस पर इस बार दिल्ली के राजपथ पर लाहौल-स्पीति का 1000 साल पुराना कीह मठ दिखेगा। गणतंत्र दिवस के लिए लगातार दूसरी बार हिमाचल की झांकी का चयन हुआ है।

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रक्षा मंत्रालय की हरी झंडी  के बाद बौद्ध धर्म के आस्था के केंद्र कीह मठ की शानदार झांकी तैयार की जा रही है। राजपथ पर कीह गोंपा की इस झांकी को आसियान देशों के प्रमुखों समेत पूरी दुनिया देखेगी।
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इससे लाहौल-स्पीति समेत पूरे हिमाचल में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को  पंख लग सकते हैं। पिछली बार चंबा रुमाल की झांकी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल की गई थी।
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जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के काजा के पास स्थित कीह गोंपा बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय से संबंधित है। यह गोंपा तिब्बत और भारत की सदियों पुरानी सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत को संजोए हुए है। समुद्रतल से करीब 4500 मीटर की ऊंचाई यह मठ एक टीले पर है। 

यहां करीब 300 भिक्षु-भिक्षुणियां बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह मठ विदेशी शोधार्थियों का भी केंद्र है। महान अनुवादक रिंचेन जंगपो के अवतारी लामा इस मठ के मठाधीश रहे हैं। वर्तमान में मठाधीश टीके लोचेन टुलकू को रिंचेन जंगपो का 19वां अवतारी लामा माना जाता है। 

आसियान के 10 देशों के प्रमुख होंगे शामिल

tableau of key monastery will be displayed in republic day parade

इस बार दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में आसियान के 10 देशों के प्रमुख शामिल होंगे। आसियान देशों के भारत से सदियों पुरानी धार्मिक व सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस में कीह मठ की झांकी संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी।

कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा का कहना है कि कीह मठ की झांकी से धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। कीह मठ के प्रमुख टीके लोचेन टुलकू ने भी खुशी जाहिर की है।

राज्य भाषा एवं संस्कृति विभाग के परफॉर्मिगिं आर्ट उप निदेशक बीके शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार को झांकी का डिजाइन और मॉडल दोनों भेजे गए। अब झांकी का चयन हो गया है। झांकी नई दिल्ली में ही बनाई जा रही है। 

इंदिरा गांधी आ चुकीं हैं दो बार  

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कीह गोंपा को वर्ष 1008 के आसपास एक बौद्ध लामा धोमतन ने बनवाया था। कीह मठ के पहले प्रमुख लामा रिंचेन्न जंगपो हुए। उसके बाद उनके अवतार लेने वाले रिंपोचे इस गद्दी को संभालते आ रहे हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी दो बार इस गोंपा के दर्शन कर चुकी हैं।

कीह गोंपा के प्रमुख अवतारी टीके लोचेन टुलकु ने बताया कि साल 2000 में कीह मठ ने अपना मिलेनियम (1000 साल) उत्सव मनाया। महामहिम दलाईलामा भी यहां दो बार आ चुके हैं।

20 बौद्ध भिक्षु भी होंगे झांकी में शामिल
झांकी के साथ कीह गोंपा के 20 बौद्ध भिक्षु भी शामिल होंगे। महिला और पुरुष भिक्षु बौद्ध धर्म के पूजा-पाठ और संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। वे लामा और पारंपरिक परिधानों में होंगे। इसके लिए कीह गोंपा में पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। 

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