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Shimla News: बीशू की साजी पर क्योंथल में बने आटे के मीठे बकरे
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जुुन्गा (शिमला)। तीन दिवसीय बैसाखी अर्थात बीशू की साजी का पर्व क्योंथल क्षेत्र में परंपरागत ढंग से मनाया गया। लोग इस पर्व पर आटे के बकरे बनाकर अपने देवताओं को अर्पित करते हैं।
बीशू वर्ष का पहला त्योहार माना जाता है। वरिष्ठ नागरिक दयाराम वर्मा, दौलत राम मेहता और अत्तर सिंह ठाकुर ने बताया कि कालांतर से इस पर्व को हर वर्ष नववर्ष के आगमन के रूप में मनाया जाता रहा है। यह त्योहार संक्रांति से दो दिन पहले आरंभ हो जाता है। पहले दिन रात को सिडडू बनाए जाते हैं। अगले दिन आटे के मीठे बकरे और रात को अस्कलियां बनाई जाती हैं। संक्रांति के दिन लोग पटांडे और खीर बनाते हैं। घर के बाहर बुरांस के फूलों की माला लगाई जाती है। प्रदेश के जाने माने साहित्यकार शेरजंग चौहान ने बताया कि बैसाख की संक्रांति आने से पहले लोग अपनी विवाहित बेटियों और बहनों को उनके घर जाकर त्योहार देने की विशेष परंपरा आज भी कायम है जिसका बेटियां बड़ी बेसब्री से इंतजार करती है। संवाद
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बीशू वर्ष का पहला त्योहार माना जाता है। वरिष्ठ नागरिक दयाराम वर्मा, दौलत राम मेहता और अत्तर सिंह ठाकुर ने बताया कि कालांतर से इस पर्व को हर वर्ष नववर्ष के आगमन के रूप में मनाया जाता रहा है। यह त्योहार संक्रांति से दो दिन पहले आरंभ हो जाता है। पहले दिन रात को सिडडू बनाए जाते हैं। अगले दिन आटे के मीठे बकरे और रात को अस्कलियां बनाई जाती हैं। संक्रांति के दिन लोग पटांडे और खीर बनाते हैं। घर के बाहर बुरांस के फूलों की माला लगाई जाती है। प्रदेश के जाने माने साहित्यकार शेरजंग चौहान ने बताया कि बैसाख की संक्रांति आने से पहले लोग अपनी विवाहित बेटियों और बहनों को उनके घर जाकर त्योहार देने की विशेष परंपरा आज भी कायम है जिसका बेटियां बड़ी बेसब्री से इंतजार करती है। संवाद
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