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बड़ा खुलासा! इतने किमी तक के दायरे में पूरी तरह सूख गई सतलुज

Thu, 02 Jun 2016 08:44 AM IST
रितेश गुलेरिया/अमर उजाला, बिलासपुर
रितेश गुलेरिया/अमर उजाला, बिलासपुर Updated Thu, 02 Jun 2016 08:44 AM IST
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Sutlej river is drying up in himachal
बिलासपुर में सतलुज का अब ऐसा नजारा दिखता है। - फोटो : अमर उजाला

किन्नौर से बिलासपुर-मंडी सीमा पर बने कोलबांध विद्युत परियोजना तक 230 किलोमीटर लंबी सतलुज नदी 73 किलोमीटर तक के दायरे में सूख गई है। बिजली परियोजनाओं को इस समस्या का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। नाथपा-झाकड़ी विद्युत परियोजना के लिए 49 किलोमीटर और रामपुर परियोजना के लिए 24 किलोमीटर लंबी टनल बनाई गई है।

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नदी का सारा पानी इन टनल के जरिए गुजारा जा रहा है। नियमानुसार नदी का 15 फीसदी पानी प्रोजेक्ट प्रबंधन को छोड़ना ही होता है, लेकिन अधिकतर समय नदी सूखी रहती है। सतलुज पर शोंग-टोंग, जंगी थोपन, थोपन पवारी और खाब में भी बिजली परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
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यदि ये धरातल पर उतरती हैं तो टनल बनने से 100 किलोमीटर नदी और सूख जाएगी। यानी कुल मिलाकर सूखी नदी का दायरा 173 किलोमीटर तक बढ़ जाएगा। विश्व बैंक के सहयोग से किए गए सर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली परियोजनाओं से नियम के मुताबिक 15 फीसदी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।
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स्पीति से कौल डैम तक हुए सर्वे में पाया गया है कि सारा पानी कई किलोमीटर तक टनल के जरिए गुजरने से नदी के आसपास की जमीनें बंजर होने लगी हैं। कोल बांध बनने से बिलासपुर की गोबिंद सागर झील पर भी इसका असर पड़ा है।

सर्वे टीम में शामिल ‘सतलुज बचाओ, जीवन बचाओ’ अभियान के संयोजक और पूर्व डीएफओ आरआर भलैक ने सतलुज के सूखने संबंधी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है।

क्या कहते हैं सरकारी अफसर

Sutlej river is drying up in himachal
हिमाचल प्रदेश सरकार

‘नदी में पानी की कमी से आसपास की भूमि में नमी कम होने से नकदी फसलों की खेती प्रभावित होगी। कई रोगों के फैलने की आशंका बढ़ेगी। जलीय जीव भी खत्म हो जाएंगे।’- डॉ. जेसी कुनियाल (जीबी पंत हिमालयन पर्यावरण अनुसंधान केंद्र मौहल- कुल्लू)

‘सभी बिजली प्रोजेक्टों को 15 फीसदी पानी नदी में छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। पानी नहीं छोड़े जाने की शिकायत सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’ - विनीत चौधरी (सदस्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हिमाचल प्रदेश)

‘पानी नियमानुसार छोड़ा जा रहा है। बरसात में नदी में 2,000 क्यूमैक्स पानी होता है जबकि सर्दियों में 60 क्यूमैक्स। यही वजह है कि सर्दियों में पानी कम दिखता है।’- संजीव सूद (जीएम नाथपा, झाकड़ी प्रोजेक्ट)

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