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Shimla: नब्बे दिन में समीक्षा नहीं होने पर सस्पेंशन अवैध, प्रोफेसर बहाल
Wed, 14 Jan 2026 11:11 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 14 Jan 2026 11:11 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी के निलंबन आदेश की समीक्षा अगर 90 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर नहीं की जाती है तो उस सस्पेंशन को अवैध करार दिया जाता है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी के निलंबन आदेश की समीक्षा अगर 90 दिनों की वैधानिक अवधि के भीतर नहीं की जाती है तो उस सस्पेंशन को अवैध करार दिया जाता है। अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए 31 अगस्त 2024 के निलंबन और उसके बाद के सभी विस्तार आदेशों को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता सहायक प्रोफेसर की सेवाओं को बहाल करने के आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही याचिकाकर्ता की निलंबन की अवधि के वेतन और अन्य लाभों को नियमों के अनुसार जारी करने के निर्देश दिए है। अदालत ने फैसले में कहा गया है कि नियम 10 (7) के तहत यदि 90 दिनों के भीतर समीक्षा नहीं होती तो निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहता और अपनी वैधता खो देता है। अदालत ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि बाद में जारी किए गए आदेशों से देरी को माफ माना जाना चाहिए। चूंकि 31 अगस्त 2024 के निलंबन आदेश की समीक्षा 28 नवंबर 2024 से पहले नहीं की गई, इसलिए इसके बाद जारी किए गए विस्तार आदेशों का कोई कानूनी महत्व नहीं रह जाता।
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