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Shimla News: आत्महत्या मामले में संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट से इन्कार

Wed, 26 Nov 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Nov 2025 11:59 PM IST
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Suspects in suicide case refuse polygraph test
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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चिड़गांव में नाबालिग की आत्महत्या का मामला, चोरी के शक में बच्चे को कर दिया गोशाला में बंद
बाद में बच्चे ने तनाव में आकर कर ली थी आत्महत्या
दीपक मेहता
शिमला। जिले के चिड़गांव थाना क्षेत्र में नाबालिग की आत्महत्या से जुड़ा चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्य आरोपी पुष्पा देवी और दो संदिग्ध महिलाओं ने अदालत में पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने से साफ इन्कार कर दिया। तीनों के इस फैसले ने मामले में नया मोड़ ला दिया है। इससे जांच की दिशा बदलती दिखाई दे रही है।


आरोप है कि पुष्पा देवी ने दुकान में सामान चोरी के शक में बच्चे को पकड़ कर गोशाला में बंद कर दिया था और बाहर निकालने के बदले बकरा मांगने जैसी शर्त रखी। पीड़ित परिवार ने दावा किया है कि बच्चे को इस दौरान जातिगत अपमान का भी सामना करना पड़ा। लगातार मानसिक उत्पीड़न के कारण बच्चा तनाव में आ गया और डर के माहौल में उसने जहरीला पदार्थ निगल लिया। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके बाद पूरा क्षेत्र आक्रोश में आ गया था। उधर विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश हुई संदिग्ध तनिशा जैहटा और पिंकी देवी ने कहा कि वह किसी भी हालत में पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं करवाएंगी। दोनों ने संयुक्त बयान में कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से स्वेच्छा से लिया है और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है। वहीं मुख्य आरोपी पुष्पा देवी को कैथू जले से कड़ी सुरक्षा में अदालत के समक्ष पेश किया गया, उसने भी पॉलीग्राफ टेस्ट का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि वह दवाइयों ले रही हैं और ऐसा परीक्षण उनकी सेहत को खतरे में डाल सकता है। अब पूरे मामले की दिशा बदलने वाले अभियोजन पक्ष के आवेदन यानी पॉलीग्राफ टेस्ट पर 29 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। इसी दिन तय होगा कि जांच किस नई राह पर आगे बढ़ेगी। इस मामले के ताजा घटनाक्रम को लेकर लोगों में खासी उत्सुकता बनी हुई है। संवाद
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कस्टडी की जरूरत नहीं, जेल वापस भेजा
यह मामला 20 सितंबर 2025 को चिड़गांव थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और बीएनएस की विभिन्न धाराओं तहत केस पंजीकृत किया है। अदालत में पेश किए साक्ष्यों में कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, वीडियो साक्षात्कार और फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्पा देवी के खिलाफ मामले को मजबूत किया। अदालत ने माना कि इस चरण में पुलिस को मुख्य आरोपी की कस्टडी की आवश्यकता नहीं है। इसलिए पुष्पा देवी को 29 नवंबर तक वापस जेल भेज दिया है।
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