सूरज की हत्या जहां हुई थी, वहां मौजूद थे आईजी जैदी
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शिमला के चर्चित गुडि़या मर्डर केस में आरोपी सूरज सिंह की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में जिला अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान कुल छह लोगों की गवाही हुई। सभी गवाहों ने पीडि़त पक्ष की गवाही का समर्थन किया। सुनवाई में मुख्य आरोपी आईजी जहूर एच. जैदी के ड्राइवर सनम गुरु नेगी की गवाही हुई। उसने बताया कि 11 जुलाई 2017 को वह जैदी को लेकर वहां गया था, जहां से गुडि़या का शव बरामद हुआ था।
अगले दिन वह जैदी को कोटखाई थाने लेकर गया। उसी दिन दोपहर को दोनों कोटखाई स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस गए, जहां गुडिया मर्डर मामले के सभी आरोपियों को रखा गया था। इन आरोपियों में सूरज सिंह भी शामिल था और इसी जगह सूरज की मौत हुई थी। उसने यह भी कहा कि 13 जुलाई तक आरोपी जैदी वहां मौजूद थे, जहां सूरज की मौत हुई थी।
इसके बाद डॉक्टर अभिषेक अस्थुल की गवाही हुई। उन्होंने कहा कि कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह सूरज की डेड बॉडी को मेरे पास लेकर आए। राजिंदर सिंह ने उस वक्त कहा था कि सूरज और अन्य आरोपियों का आपस में झगड़ा हुआ था। इससे सूरज बेहोश हो गया। जब डाक्टर ने सूरज की नस चेक की तो वह बंद थी। ईसीजी मशीन में सीधी लाइन दिख रही थी। उसके बाद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इसके अलावा चार अन्य गवाहों ने भी पीडि़त पक्ष की गवाही का समर्थन किया।
क्या था मामला
शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसका शव बरामद हुआ। एसआईटी ने स्थानीय युवक और पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी शामिल था। इसके बाद कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर की वजह से सूरज की मौत हुई थी।
इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच. जैदी, एसपी डी डब्ल्यू नेगी, ठियोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।