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15 हजार अस्थाई शिक्षकों के भविष्य पर आज आ सकता है सुप्रीम फैसला

Tue, 03 Dec 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 03 Dec 2019 05:00 AM IST
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Supreme court decision on the future of 15 thousand temporary teachers himachal
सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में नियुक्त करीब 15 हजार पीटीए, पैट, पैरा, ग्रामीण विद्या उपासक शिक्षकों के भविष्य को लेकर मंगलवार को बड़ा फैसला आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 12 में इस मामले को लेकर सुनवाई होना निश्चित हुई है। पीटीए, पैट और पैरा शिक्षक बीते कई सालों से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं।

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फरवरी 2017 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लीव ग्रांट में डालते हुए स्टेटस को लगा दिया था। इस आदेश के स्पष्टीकरण की अपील भी बीते साल कोर्ट में डाली गई थी, जिसकी सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण देने की जगह अंतिम फैसला ही सुनाने की बात कही है। फरवरी 2017 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को भविष्य में शिक्षकों की भर्ती कमीशन के माध्यम से करने को कहा था।
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कोर्ट ने सरकार को भविष्य में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के आदेश दिए थे। इसी दौरान कोर्ट ने मामले को लीव ग्रांट में डालते हुए स्टेटस को लगा दिया था। कोर्ट के इस फैसले के चलते ही प्रदेश सरकार शिक्षकों को नियमित नहीं कर पा रही है। इन शिक्षकों को राहत देते हुए फिलहाल सरकार ने वेतन बढ़ोतरी जरूर कर दी है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिक गई हैं। 

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2014 में शिक्षकों के हक में आया था हाईकोर्ट का फैसला

अगर कोर्ट शिक्षकों के हक में फैसला सुनाता है तो हजारों शिक्षकों के नियमितीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा। अगर फैसला हक में नहीं होता है तो शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।

हिमाचल हाईकोर्ट ने साल 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने 10 साल का सेवाकाल पूरा कर चुके पैरा शिक्षकों को नियमित किया था। सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुके पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया था।

इसी बीच कुछ लोगों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। जनवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर यथा स्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए। इसके चलते प्रदेश सरकार शिक्षकों को नियमित नहीं कर पा रही है।

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