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हजारों कर्मचारियों को बड़ा झटका, नहीं मिलेगी पुरानी पॉलिसी में पेंशन

Sun, 02 Oct 2016 11:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 02 Oct 2016 11:26 PM IST
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Supreme Court Decision on 1999 Pension Policy for Boards Employees.

हिमाचल में बोर्डों, निगमों और अन्य स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ा झटका लगा है। 29 नवंबर 2004 के बाद नियुक्त नियमित कर्मचारियों को वर्ष 1999 की नीति के तहत पेंशन लाभ नहीं मिलेगा।

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इस संबंध में हिमाचल हाईकोर्ट का कर्मचारियों के पक्ष में लिया फैसला सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसे मंजूर कर लिया गया। प्रदेश में पुरानी पेंशन नीति के तहत लगभग 20 कॉरपोरेट संस्थाएं हैं।
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ये स्वायत संस्थाएं उद्योग, सामाजिक कल्याण, बागवानी, वन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, पर्यटन, नगर नियोजन, आवास एवं सामान्य प्रशासन जैसे विभागों से संबंधित हैं। इनके करीब सात हजार कर्मचारी और पेंशनर सरकार की पुरानी नीति के तहत पेंशन लाभ से वंचित होंगे।

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2004 को रद्द की थी योजना

Supreme Court Decision on 1999 Pension Policy for Boards Employees.

हिमाचल सरकार के सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त महाधिवक्ता सूर्यनारायण सिंह ने इस फैसले की पुष्टि की है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हिमाचल सरकार एवं अन्य बनाम राजेश चंद्र सूद आदि मामले पर सुनाया है।

फैसले के मुताबिक कर्मचारियों को बेहतर सेवानिवृत्ति लाभ देने के लिए हिमाचल सरकार ने 29 अक्तूबर 1999 को हिमाचल प्रदेश कॉरपोरेट सेक्टर कर्मचारी पेंशन स्कीम बनाई। इस योजना का लाभ केवल नियमित कर्मचारियों को ही दिया जाना था।

उस समय बोर्डों, निगमों के कर्मचारियों को ये ऑप्शन भी दिया गया कि वे इस पेंशन योजना को चुनना चाहते हैं या फि र प्रोविडेंट फंड स्कीम को ही जारी रखना चाहते हैं। एक उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद 29 नवंबर 2004 को इस योजना को रद्द कर दिया गया।

कोर्ट ने खारिज की कर्मचारियों की दलील

Supreme Court Decision on 1999 Pension Policy for Boards Employees.

हालांकि, ये भी निर्णय लिया गया कि जो कर्मचारी इस तिथि से पहले सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उन पर इसका असर नहीं होगा। इसके बाद कई कर्मचारी हाईकोर्ट चले गए। इस पर सरकार ने उच्च न्यायालय में आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की दलील दी, मगर ये खारिज कर दी गई।

दिसंबर 2013 में आए हिमाचल हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में अपील कर दी। तमाम पक्षों की सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इसमें किसी भी तरह के संवैधानिक अधिकार का हनन साबित नहीं हो रहा है और कहा कि हिमाचल सरकार की कार्रवाई अथॉरिटी के तहत ही है।

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