हिमाचल में कितने अवैध कब्जे, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा रिकॉर्ड
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वन भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट भी सख्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार से रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा है कि कुल कितनी वन भूमि पर कितने लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। कोर्ट ने सरकार को यह सारी जानकारी शपथ पत्र के माध्यम से देने के आदेश दिए हैं। प्रदेश सरकार को अवैध कब्जों पर कार्रवाई करने के पर्याप्त प्रमाण भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखने होंगे।
केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ संबंधित सरकारों की ओर से अपने विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम 2006 की संवैधानिक वैद्यता और इस अधिनियम के कारण वन संरक्षण को पैदा हुए खतरे को लेकर विभिन्न मामलों में सुनवाई चल रही है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया है कि पूरे देश में पिछले वर्ष सितंबर तक लगभग 44 लाख दावे वन अधिकार के सामने आए और सक्षम अधिकारियों ने लगभग साढ़े बीस लाख दावे खारिज किए।
वन अधिकार पर भी मांगा रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उन कब्जाधारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है जिनके वन अधिकार और पट्टा ग्रांट केस वन अधिकार कानून के तहत रिजेक्ट कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि सरकार ने ऐसे कितने मामले रिजेक्ट किए हैं और ऐसे लोगों ने कुल कितनी वन भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है।
हिमाचल से छह माह में हटेंगे कब्जे
हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश में वन भूमि पर 10 बीघा से अधिक अवैध कब्जे कर सेब बगीचे उगाने के मामले में छह माह और दस बीघा से कम कब्जे वालों पर एक साल के भीतर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सभी अवैध कब्जों को छुड़वाने को कहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ एक संस्था ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन एनजीटी ने हाईकोर्ट के आदेशों में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।