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सुन्नी बांध प्रोजेक्ट: मंडी-शिमला के 12 गांवों की भूमि का होगा अधिग्रहण, ऊर्जा विभाग ने जारी की अधिसूचना

Sun, 26 Apr 2026 11:18 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 26 Apr 2026 11:18 AM IST
सार

सुन्नी बांध जलविद्युत परियोजना के लिए करीब 12 गावों में जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। अधिसूचना के अनुसार जिला शिमला और मंडी के विभिन्न गांवों में कुल 09-10-99 हेक्टेयर (117-12-11 बीघा) निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...

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Sunni Dam Project Land in 12 Villages Across Mandi and Shimla to be Acquired Notification
सुन्नी बांध प्रोजेक्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में बहुप्रतीक्षित सुन्नी बांध जलविद्युत परियोजना के लिए करीब 12 गावों में जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। परियोजना को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऊर्जा विभाग ने 382 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना के निर्माण के लिए निजी भूमि अधिग्रहण की दिशा में प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है। 

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अधिसूचना के अनुसार जिला शिमला और मंडी के विभिन्न गांवों में कुल 09-10-99 हेक्टेयर (117-12-11 बीघा) निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। शिमला जिले की सुन्नी और कुमारसैन तहसीलों के मंगना, लुंसू, जैशी, भरारा और माजरोग गांवों के अलावा मंडी जिले की करसोग तहसील के भौरा, जकलीन, मगन, फाफन, परलोग, बेलुधांक और खारयाली गांव इस दायरे में आएंगे। परियोजना से जुड़े सामाजिक प्रभाव आकलन में स्पष्ट किया गया है कि भूमि अधिग्रहण के बावजूद किसी भी परिवार के विस्थापित होने की संभावना नहीं है। यह रिपोर्ट संबंधित जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम और सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट यूनिट के अध्ययन के बाद तैयार की गई है। 

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अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रभावित क्षेत्र की भूमि पर खरीद-फरोख्त और किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर रोक लगा दी गई है। अब बिना अनुमति के कोई भी व्यक्ति भूमि का लेनदेन नहीं कर सकेगा। यह प्रावधान भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 11(4) के तहत लागू किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुन्नी बांध जलविद्युत परियोजना के पूर्ण होने पर प्रदेश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह परियोजना न केवल बिजली उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे को भी मजबूती देगी।

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आपत्तियों के लिए  60 दिन का समय
यदि किसी को अधिग्रहण पर आपत्ति है, तो वह अधिसूचना जारी होने की तिथि से 60 दिन के भीतर अपने दावे या आपत्तियां भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, सुन्नी बांध परियोजना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। सरकार ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों को भूमि का सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए संबंधित भूमि पर प्रवेश करने के अधिकार भी प्रदान किए हैं। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन का प्रशासक नियुक्त किया गया है।

परियोजना का काम रोका 
सतलुज नदी पर निर्माणाधीन लूहरी जल विद्युत परियोजना के खिलाफ प्रभावित किसानों का क्रमिक आंदोलन शुरू हो गया है।  नीरथ में समस्याओं को लेकर किसान सभा के बैनर तले शुक्रवार को शिमला और कुल्लू जिले के प्रभावितों ने प्रदर्शन किया। अब शनिवार से किसान धरने पर बैठ गए हैं। रोषजदा किसानों ने परियोजना का निर्माण कार्य भी रोक दिया है। 
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