संकट के सिपाही : खुद कैंसर से पीड़ित, फिर भी कोरोना मरीजों तक दवाएं पहुंचा रही हैं वीना
- बिलासपुर के मैहरी की वीना ने 15 महीनों से नहीं ली एक भी छुट्टी, लोगों को भी कर रहीं जागरूक
- 392 लोगों को पहुंचाई घर जाकर दवाई तो 1393 को लगाई वैक्सीन
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स्वास्थ्य केंद्र पंतेहड़ा में कार्यरत कैंसर पीड़ित स्वास्थ्य कार्यकर्ता वीना कुमारी बिना छुट्टी 15 महीनों से कोविड मरीजों के लिए घर-द्वार सेवाएं दे रही हैं। बड़ी बात यह है कि महिला कार्यकर्ता के क्षेत्र की आबादी करीब चार हजार है। वह लोगों को कोरोना से बचने के लिए लगातार जागरूक कर रही हैं। दिन में आठ घंटे ड्यूटी देने के बाद आपात स्थिति में भी मरीज के घर दवाइयां देने जाती हैं। घुमारवीं उपमंडल के स्वास्थ्य केंद्र पंतेहड़ा में कार्यरत स्वास्थ्य कार्यकर्ता वीना कुमारी खुद भी कैंसर से पीड़ित हैं।
उन्होंने लगभग पंद्रह महीनों से लोगों को कोविड के प्रति जागरूक किया है। उनके क्षेत्र में डेढ़ साल में 57 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। ये सभी मरीज होम आइसोलेशन में ही स्वस्थ हो गए हैं। वीना 12 सालों से सेवाएं दे रही हैं। वह घुमारवीं के गांव मैहरी की रहने वाली हैं। कोरोना कर्फ्यू के दौरान बसें नहीं चल रही हैं तो वह किराये की गाड़ी कर लोगों का उपचार कर रही हैं।
वीना ने कहा कि वह दो सालों से ज्यादा समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रही हैं। कोरोना काल में एक भी छुट्टी नहीं ली। पंतेहड़ा केंद्र के अधीन 392 लोगों को घर-द्वार दवाएं उपलब्ध करवाने के साथ कोविड के नियमों के पालन करने के लिए भी लोगों को जागरूक किया। स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने 1393 लोगों को वैक्सीन भी लगाई है। उधर, उपायुक्त रोहित जम्वाल ने कहा कि कोविड काल में बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। खुद इतनी बड़ी बीमारी से जूझते हुए दूसरों की जिंदगी बचाना सराहनीय है।
जो अस्पताल नहीं पहुंच सकते उनको घर पर लगाई वैक्सीन
तबस्सुम आरा, कश्मीर
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में तबस्सुम आरा भी वैक्सीनेश अभियान का हिस्सा हैं। जिले के अस्पताल में तैनात वैक्सीनेशन अफसर तबस्सुम 4 महीने में 6 हजार से ज्यादा लोगों का टीकाकरण कर चुकी हैं। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों को कवर करने के लिए डोर टू डोर मिशन भी शुरू किया है। उन्होंने लोगों को टीकाकरण के लिए समझाया और उनकी बात लोगों ने मानी भी। तबस्सुमन का कहना है कि लोगों की सेवा करके उन्हे काफी खुशी मिलती है। इस काम में उन्हे परिवार का भी सहयोग मिलता है।
डेढ़ साल से निभा रहे हैं फर्ज, कर रहे हैं मरीजों की सेवा
डॉ. रोहित चौहान, जोगिंद्रनगर (मंडी), हिमाचल प्रदेश
कोरोना काल में हर वर्ग के लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा उठाकर उपमंडल जोगिंद्रनगर के चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। कई स्वास्थ्य कर्मी और चिकित्सक खुद कोरोना की चपेट में आने के बावजूद अपना फर्ज निभाने से पीछे नहीं हटे। लडभड़ोल क्षेत्र के चिकित्सक डॉ. रोहित चौहान (26) भी अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं। गोरा रोपा गांव से संबंध रखने वाले रोहित की माता रानी देवी आशा कर्वर हैं। पिता विजय चौहान सरकारी ठेकेदार हैं। रोहित ने कोविड काल में अब तक दस हजार से अधिक सैंपल लिए हैं। पिछले साल नवंबर में कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद स्वस्थ होकर दूसरी लहर में भी संक्रमित मरीजों की सेवा में डटे हैं।
बीते 18 माह में सिविल अस्पताल लडभड़ोल में निरंतर सेवाएं देकर न केवल कोरोना संक्रमित मरीजों को उपचार दिलाया, बल्कि वैक्सीनेशन अभियान को भी रफ्तार दिलाई। कोविड सैंपलिंग की टीम में तैनात डॉ. अंकुश, प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र के लैब तकनीशियन विनोद कुमार, मकरीड़ी से फार्मासिस्ट रितेश के साथ तैनात स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने उनके साथ अहम भूमिका निभाई है।
एक लाख सैंपलों की जांच कर चुके हैं अब तक
रोहित चौधरी, लैब तकनीशियन, चंबा, हिमाचल प्रदेश
कोरोना के खिलाफ जंग में डॉक्टरों और नर्सों के साथ आउटसोर्स पर तैनात लैब तकनीशियन भी डटे हैं। चंबा मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स पर तैनात सीनियर लैब तकनीशियन रोहित चौधरी लैब में एक लाख लोगों के कोरोना सैंपलों की जांच कर चुके हैं। पिछले पांच महीने से अपने घर कांगड़ा भी नहीं गए हैं। छह माह से उनकी ड्यूटी मेडिकल कॉलेज के फ्लू क्लीनिक में लगी है। यहां कोरोना जांच के लिए सैंपल ले रहे हैं। एक लाख लोगों की कोरोना जांच करने के साथ एक हजार लोगों के कोरोना जांच के लिए सैंपल लेने पर भी वह संक्रमित नहीं हुए हैं। इसके लिए वह पूरी सतर्कता बरतते हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें दो बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
पिछले साल कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने पर चंबा में आरटीपीसीआर लैब शुरू की गई थी। इसके लिए दो चिकित्सकों और एक लैब तकनीशियन को ट्रेनिंग के लिए पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया था। लैब तकनीशियन के रूप में रोहित ठाकुर चंडीगढ़ गए थे। उन्होंने तीन दिन की ट्रेनिंग लेने के बाद चंबा में आरटीपीसीआर लैब में पहला कोरोना सैंपल जांचा। इसके बाद लगातार आरटीपीसीआर लैब में डटे रहे। उन्होंने टीम के साथ एक लाख सैंपलों की जांच की। इसमें हजारों सैंपल कोरोना संक्रमित भी निकले। शुरुआती दौर में वह दिन-रात काम में डटे रहते थे। बाद में स्टाफ बढ़ने पर रूटीन में ड्यूटी लगने लगी। कोरोना की दूसरी लहर में भी वह पांच महीने से लगातार ड्यूटी दे रहे हैं।