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अब शीशे की छत वाले पारदर्शी कोच से लें दिलकश वादियों का नजारा

Mon, 12 Nov 2018 10:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 12 Nov 2018 10:04 AM IST
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Successful trial of vestadom on Kalka-Shimla heritage track

कश्मीर की तर्ज पर अब घूमने के लिए टॉय ट्रेन में कालका से शिमला आने वाले पर्यटक भी शिवालिक शृंखलाओं के प्राकृतिक सौंदर्य का मजा पारदर्शी शीशे की बड़ी बड़ी खिड़कियों और शीशे की छत वाली विस्टाडोम कोच (सीटी-15) में बैठकर ले सकेंगे।

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रेलवे के अंबाला मंडल की ओर से यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कालका शिमला रेलवे ट्रैक पर विस्टाडोम का सफल ट्रायल किया गया है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी और मंजूरी मिलते ही नियमित तौर पर कालका और शिमला के बीच विस्टाडोम का संचालन शुरू हो जाएगा।
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रेलवे के चीफ इंस्पेक्टर ऑफ रिपेयर्स आशीष कुमार ने इसकी पुष्टि की है। कश्मीर के बनिहाल-बारामुल्ला रेलवे सेक्शन पर विस्टाडोम कोच का संचालन किया जाता है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जून 2018 में शिमला दौरे के दौरान रेलवे अधिकारियों को कालका-शिमला ट्रैक पर विस्ताडोम का संचालन शुरू करने के निर्देश दिए थे।

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यह है कोच की खासियत

Successful trial of vestadom on Kalka-Shimla heritage track

रविवार सुबह 8:17 बजे शिमला रेलवे स्टेशन से विस्टाडोम कोच ट्रायल के लिए कालका रवाना किए गए। रेलवे स्टेशन पर पहले स्पेशल कोच की सफाई की गई। ट्रायल का निरीक्षण करने के लिए विशेष तौर पर अंबाला से रेल अधिकारी शिमला पहुंचे थे।

शिमला रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक प्रिंस सेठी ने बताया कि ट्रायल के लिए शनिवार शाम 4:40 बजे विस्टाडोम शिमला पहुंचा था, रविवार सुबह शिमला से कालका की ओर स्पेशल कोच का ट्रायल किया गया है।

विस्टाडोम कोच वातानुकूलित है। इसकी खिड़कियां मोटे पारदर्शी शीशे की हैं जो सामान्य से कहीं ज्यादा बड़ी हैं। इसकी छत भी शीशे की है। कोच का इंटीरियर भी खास तौर पर डिजाइन किया गया है।

डिब्बे के दरवाजे और खिड़कियों में कठोर शीशे का इस्तेमाल किया गया है और स्टील रेलिंग लगाई गई है। एलईडी लाइटें तथा तापमान मापक यंत्र भी लगाया गया है। कोच को वॉयलेट और सुनहरे रंगों से रंगा गया है।

सुविधा फाइव स्टार की पर टॉयलेट नहीं

Successful trial of vestadom on Kalka-Shimla heritage track

विस्टाडोम कोच में रेलवे ने फाइव स्टार सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं लेकिन इस कोच में टॉयलेट नहीं है। विशेष कोच के साथ जनरेटर और स्टॉफ के लिए जोड़े जाने वाले डिब्बे में टॉयलेट की सुविधा है।

ऐसे में अगर किसी यात्री को चलती गाड़ी में टॉयलेट इस्तेमाल करना है तो उसे अगले स्टेशन पर गाड़ी रुकने का इंतजार करना होगा। इतना ही नहीं कोच में लगाई गई कांच की छत भी चिंता का विषय है। भूस्खलन की स्थिति में कोच और इसमें सवार यात्रियों को नुकसान पहुंच सकता है।

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