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कामयाबी: हिमाचल के सरकाघाट की नेहा ने तैयार कीं ईको फ्रेंडली ईंटें, छह रुपये में मिलेगी

Fri, 25 Mar 2022 10:40 AM IST
Krishan Singh त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
त्रिपुरारी सांख्यान, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Fri, 25 Mar 2022 10:40 AM IST
सार

 नेहा ठाकुर ने बेकार मैटीरियल जैसे कागज, बारीक रेत, नारियल के छिलकों और साधारण सीमेंट से ईको फ्रेंडली ईंटें तैयार की हैं। एक ईंट मात्र छह रुपये में उपलब्ध होगी, जबकि दूसरी एक ईंट 10 से 12 रुपये में मिलती है। 

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Success story: Neha thakur of Himachal Sarkaghat prepared eco friendly bricks will be available for six rupees
नेहा ने तैयार कीं ईको फ्रेंडली ईंटें। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के सरकाघाट की नेहा ठाकुर ने बेकार मैटीरियल जैसे कागज, बारीक रेत, नारियल के छिलकों और साधारण सीमेंट से ईको फ्रेंडली ईंटें तैयार की हैं। ये ईंटें पर्यावरण के लिए फायदेमंद होने के साथ कम लागत और कम वजन में उपलब्ध होंगी। प्राकृतिक रेशों से तैयार ये ईंटें मकान की दीवारों, सुरंगों और फुटपाथ की चिनाई में लगाई जा सकेंगी। एक ईंट मात्र छह रुपये में उपलब्ध होगी, जबकि दूसरी एक ईंट 10 से 12 रुपये में मिलती है। ईको फ्रेंडली एक ईंट का भार तीन किलोग्राम होगा, जबकि दूसरी ईंट का वजन चार किलो तक होता है। आमतौर पर दूसरी ईंटों में पानी को सोखने की क्षमता बहुत अधिक होती है लेकिन ईको फ्रेंडली ईंट में बहुत कम पानी सोखने की क्षमता है।

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इससे पानी का भी संरक्षण होगा। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग करने के बाद नेहा एक इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि इन ईंटों को तैयार करने का मकसद नारियल फाइबर के साथ रेत को आंशिक रूप से बदलकर को फाई ब्रिक्स बनाना और पर्यावरण के अनुसार ईंटों को विकसित कर बेकार कागज का उपयोग करना है। वह हमेशा सोचती थीं कि देश में बेस्ट की समस्या सबसे अधिक है और इसे कैसे कम किया जाए। सभी शोधकर्ताओं ने इसे कम करने के लिए कई शोध किए, मगर किसी ने ईंट नहीं बनाई। 
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बाहरी मौसम की स्थिति के लिए अच्छी प्रतिरोधक क्षमता
नेहा के अनुसार कम जल अवशोषित करने वाली ईंटों में बाहरी मौसम की स्थिति के लिए अच्छी प्रतिरोधक क्षमता होती है। कहा कि एक नियम के अनुसार पानी सोखने की क्षमता ईंट के भार के अनुसार 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। को फाई ब्रिक्स में ईंट वजन के हिसाब से 16 प्रतिशत पानी सोखती हैं। तैयार की गई ईंटों को धूप में तीन दिन तक सुखाया जाता है। फिर वजन का परीक्षण होता है। इसके बाद इस ईंट का वजन 3.16 किलोग्राम होगा। नेहा ने इस ईंट पर पेटेंट भी फाइल किया है।

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