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यहां जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे नौनिहाल, ये है वजह

Tue, 03 Sep 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh राजपाल शर्मा, अमर उजाला, सतौन (सिरमौर)
राजपाल शर्मा, अमर उजाला, सतौन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Tue, 03 Sep 2019 05:00 AM IST
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students are reaching school by crossing flooded river on putting lives on stake
- फोटो : अमर उजाला

हिमाचल के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के स्कूली बच्चे हर दिन मौत को चुनौती देकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। आजकल गिरि नदी पूरे उफान पर है और ऐसे में छछेती पंचायत के कई गांवों के बच्चों को नदी पार करके स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।

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परिजन बच्चों को स्कूल पहुंचाने जा रहे हैं, जिन्हें हर रोज बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें स्कूल पहुंचाना पड़ रहा है। जटिल भौगोलिक परिस्थितियां और सरकारी अनदेखी स्कूली विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है।
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बारिश के बाद छछेती पंचायत के क्यारी, डाडुवा, कईला समेत आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों का जीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों का संपर्क अभी भी अन्य क्षेत्रों से नहीं जुड़ पाया है।
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ग्रामीणों को अपने बच्चे स्कूल जान जोखिम में डालकर भेजने पड़ रहे हैं। गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ना तो दूर फुटब्रिज बनाने में भी सरकार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। सतौन से श्री रेणुका जी तक कहीं पर भी गिरि नदी के आर-पार होने के लिए कोई फुटब्रिज या पुल आदि नहीं है।

बच्चे उफनती नदी को पार करने के लिए विवश

students are reaching school by crossing flooded river on putting lives on stake

लिहाजा, स्कूली बच्चे उफनती नदी को पार करने के लिए विवश हैं। इससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय नेताओं के खिलाफ भी लोग आक्रोशित हैं। क्यारी गांव के अभिभावकों को स्कूल के बच्चों को गिरि नदी पार करवाने खुद जाना पड़ रहा है।

ग्रामीण सुरेश, मदन शर्मा, विनोद शर्मा, रमेश अत्री, बृजेश अत्री आदि ने बताया कि बरसात के दो महीने बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों का जीवन पटरी पर नहीं लौटा है। एक गांव का दूसरे गांव से संपर्क कट गया है।

ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस बार उनके हित में कार्य नहीं किया गया तो ग्रामीण हर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उधर, अध्यापक मदन अत्री और बृजेश अत्री ने बताया कि बरसात के समय गांव में कहीं और भी पैदल तक का रास्ता नहीं है।

एक गांव से दूसरे गांव तक जाने के रास्ते ग्रामीणों ने स्वयं अपने पैसे और श्रमदान कर बनाए हैं। ग्रामीण सुरेश ने बताया कि बरसात के मौसम में चिंता रहती है कि सभी कुशलपूर्वक घर वापस आएंगे या नहीं। किसी भी सरकार ने उनके बारे में नहीं सोचा।

अब हर राजनीतिक दल से उनका मोह भंग हो चुका है। रेणुका के विधायक विनय कुमार ने बताया कि फुटब्रिज का कोई प्रपोजल नहीं है। अलबत्ता बनैत से चांदनी पुल बनाने को विधायक प्राथमिकता में डाला गया है। डडुवा कइला से फुटब्रिज की मांग को भी पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

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