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मान्यता रद्द फिर भी कर ली 200 सीटों पर एडमिशन

Mon, 19 Jan 2015 09:28 AM IST
Updated Mon, 19 Jan 2015 09:28 AM IST
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student pursuing B.ed from Fake college in kangra.

कांगड़ा जिले के एक निजी बीएड कॉलेज में छात्रों की एडमिशन फर्जीवाड़े से कर दी गई है। इस कॉलेज की मान्यता रद्द हो चुकी है। प्रदेश विश्वविद्यालय से इसकी संबद्धता भी नहीं है। बावजूद इसके यह कॉलेज एचपीयू को भेजे गए महज एक लिखित आवेदन के आधार पर सत्र 2014-15 के लिए 200 बच्चों को बीएड करवा रहा है। कॉलेज की मान्यता और संबद्धता न होने से 200 बच्चों के भविष्य पर भी संकट के बादल छा गए हैं।

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जयपुर स्थित एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन) के एनआरसी (नार्दन रिजनल कमेटी) के क्षेत्रीय निदेशक डा. आईके मंसूरी ने आरटीआई से मांगी जानकारी में 18 दिसंबर 2014 को पत्र संख्या फाइल नंबर एनआरसी/एनसीटीई/एचपी-209 एंड एचपी-232/कंपलेंट/2014/79868 के जरिये दिए उत्तर में माना है कि एनआरसी ने संबंधित कॉलेज की मान्यता को विदड्रा कर लिया है।
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आरटीआई में पता चला रद्द हो चुकी है मान्यता

student pursuing B.ed from Fake college in kangra.

आरटीआई से मांगी गई जानकारी में एचपीयू के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष की ओर से 31 दिसंबर, 2014 को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि एक लिखित आवेदन पर इस संस्थान को वर्ष 2014-15 के लिए यूनिवर्सिटी से बीएड के लिए सेंट्रल काउंसिलिंग में भाग लेने को अनुमति दी गई है। एनसीटीई के एक्ट पर गौर करें तो किसी भी संस्था या विवि को इस तरह का कोई अधिकार नहीं है।

इसी पत्र से यह भी स्पष्ट है कि इस कॉलेज को काउंसिलिंग में भाग लेने की इजाजत बिना संबद्धता के दी गई है। उधर, कॉलेज प्रिंसिपल का कहना है कि एक मामला कोर्ट में होने के चलते एचपीयू ने हमें बीएड कोर्स चलाने की प्रोवीजनल अनुमति दी है। कॉलेज को मान्यता और संबद्धता दोनों मिलने के चलते ही बीएड कोर्स चलाया जा रहा है।

यह कहता है एनसीटीई का अधिनियम

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एनसीटीई एक्ट 1993 के अधिनियम 16 के अनुसार कोई भी विवि एनसीटीई की मान्यता मिलने के बाद ही किसी भी शैक्षणिक संस्थान को संबद्धता दे सकता है। चाहे वह प्रोविजनल हो या कोई अन्य। जिस संस्थान को रिकोगभनाइजेशन नहीं मिली होगी, विवि उसकी कोई भी वार्षिक परीक्षा चाहे वह प्रोविजनल हो या अन्य, आयोजित नहीं करवा सकेगा।

एनसीटीई एक्ट 1993 के अधिनियम 16 ख के अनुसार जिस संस्थान को एनसीटीई की मान्यता नहीं मिली है, उससे संबंधित विवि उसके किसी पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण को प्रोविजनल और अन्य परीक्षा आयोजित नहीं कर सकेगा।

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क्या बोले एचपीयू के वीसी

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एचपीयू के वीसी प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि जिला कांगड़ा के शैक्षणिक संस्थान को विवि ने बीएड के 2014-15 सत्र को प्रोविजनल अनुमति दी है। एनसीटीई की जयपुर स्थित नॉर्थ रीजन कमेटी की ओर से संस्थान की रिकोग्नाइजेशन विदड्रा करने के फैसले पर दिल्ली स्थित एनसीटीई के मुख्यालय से रोक लगा दी गई थी।

इसी आधार पर संस्थान को प्रोविजनल अनुमति दी गई है। विवादों में रहा है कॉलेज- खास बात यह है की संबंधित संस्थान के एमडी, प्राचार्य सहित नौ लोगों को पहले ही सीबीआई की विशेष अदालत से फर्जी डिग्री मामले में दो-दो साल सजा सुनाई गई है। इसके लिए अदालत ने दोषियों को अपील का समय दिया है।

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