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संकट के सिपाही : जिम्मेदारी और जज्बे के साथ दिन-रात कर रहे हैं सेवा
Thu, 20 May 2021 09:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 20 May 2021 09:34 AM IST
सार
कोरोना के संकट ने हमे समाज के कुछ गुमनाम सिपाहियों और योद्धाओं से भी रूबरू कराया है। ये योद्धा मरीजों की सेवा में दिन-रात लगे हुए हैं।
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संकट के सिपाही... अनुराधा चौधरी, अशोक राणा और कुबेर कौशल गौड़
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कहते हैं कि संकट की घड़ी में जो काम आए वही सच्चा मित्र है, लेकिन कोरोना जैसी महामारी के बीच जो अपनी परवाह किए बगैर मरीजों की सेवा कर रहा है वह किसी सिपाही से कम नहीं है। इनका समर्पण भाव सराहनीय है।आज भी कुछ ऐसे कोरोना योद्धाओं की जुबानी जो जज्बे और जिम्मेदारी के साथ मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं...
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परिवार की तरह कर रही हैं मरीजों की देखभाल
अनुराधा चौधरी, नर्स, ट्रॉमा अस्पताल, सांबा, जम्मू
संक्रमण का डरकर नहीं बल्कि सतर्क रहकर सामना करना चाहिए। यह कहना है सांबा ट्रॉमा अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स अनुराधा चौधरी का। अनुराधा न केवल निडरता से ड्यूटी कर रही हैं बल्कि सहकर्मियों को भी इस घड़ी में निडरता से ड्यूटी के लिए प्रेरित करती हैं। अनुराधा कहती हैं कि नर्सिंग के पेशे में उन्हें कई वर्ष हो गए हैं। कोरोना काल में भी हर मरीज का परिवार के सदस्य की तरह खयाल रखना जरूरी है।
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अनुराधा ने बताया कि इस दौरान संक्रमित होने का खतरा जरूर है लेकिन यह ड्यूटी का जोखिम है जिसमें डर से ज्यादा जिम्मेदारी का अहसास रहता है। अनुराधा के परिवार के सदस्य भी उनका पूरा समर्थन करते हैं। वे कहती हैं कि महामारी को मात देने के लिए मास्क पहनने, बार-बार हाथ धोने जैसे उपाय करना मुश्किल नहीं है।
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एक साल 20 में हजार का ले चुके हैं सैंपल, नहीं ली छुट्टी
कुबेर कौशल गौड़, वरिष्ठ लैब तकनीशियन, क्षेत्रीय अस्पताल, कुल्लू
कुबेर कौशल गौड़ एक साल में 20 हजार से अधिक लोगों के सैंपल ले चुके हैं। सैंपल जुटाने के अलावा अस्पताल की लैब को भी संभाल रहे हैं। खास बात है कि दिन-रात इतने लोगों के सैंपल लेने के बावजूद वह कोरोना की चपेट में नहीं आए हैं। कोरोना काल में एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इस दौरान वह अवकाश पर नहीं गए हैं। दिन और रात दोनों शिफ्टों में काम कर रहे हैं। खराहल घाटी के गांव पुरोहित डोभी के कुबेर गौड़ कोरोना काल में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रति समर्पित हैं।
अगले माह वे सेवानिवृत्त हो जाएंगे। पत्नी ओर दो बेटों को छोड़कर वह कोरोना काल में सेवाएं दे रहे हैं। कुबेर कौशल गौड़ ने कहा कि उन्हें अस्पताल प्रबंधन और उनके सहयोगियों का बखूबी साथ मिला है। वरिष्ठ लैब तकनीशियन चंद्रकांता, मानइेई, सीमा, वीर सिंह, लैब तकनीशियन बहादुर सिंह और लैब सहायक ज्ञान चंद और नरेश कुमार के सहयोग से अब तक क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में करीब 51 हजार कोरोना सैंपल लिए जा चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू डॉ. सुशील चंद्र शर्मा ने भी कोरोना काल में लैब तकनीशियन कुबेर गौड़ की सेवा की सराहना की।
शवों को श्मशान पहुंचाने के लिए आगे आए, दिया वाहन
अशोक राणा, ऊना, हिमाचल प्रदेश
कोरोना संकट के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मुश्किल घड़ी में जरूरतमंदों के साथ खड़े होकर उनका दुख-दर्द बांटने में लगे हैं। ऐसी ही मिसाल इन दिनों दुलैहड़ गांव के अशोक राणा पेश कर रहे हैं। अशोक कोरोना संक्रमितों के लिए निशुल्क गाड़ी की सेवा देते हैं।
जिला कांगड़ा में कोविड संक्रमित मां के पार्थिव शरीर को अकेले बेटे की ओर से कंधे पर रखकर श्मशान घाट तक पहुंचाने के मामले के बाद अशोक राणा ने निशुल्क गाड़ी सेवा देने का फैसला लिया है। घटना के बाद से उन्होंने फैसला लिया है कि कोरोना संक्रमितों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए वह खुद सेवा देंगे।
पेशे से चालक अशोक राणा के इस कदम को सभी सराह रहे हैं। अशोक राणा ने कहा कि उन्होंने अपनी गाड़ी को किसी भी कोविड पीड़ित परिवार के लिए निशुल्क सेवा की पेशकश की है। चाहे सेवा कोरोना संक्रमित के लिए हो या फिर कोरोना संक्रमित मृतकों के लिए। वह कोरोना संक्रमितों को घर से अस्पताल और अस्पताल से घर या फिर संक्रमित मृतकों के शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए निशुल्क सेवा देते हैं। वह इसके लिए 24 घंटे तैयार रहते हैं।