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सोलन: मशरूम उत्पादन में भारत चौथे पायदान पर, विपणन और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने पर जोर
Thu, 10 Sep 2026 10:56 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 10 Sep 2026 10:56 PM IST
सार
मशरूम उत्पादन में भारत विश्व में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। देश में मशरूम उत्पादन 10 वर्ष पूर्व लगभग एक लाख टन था, वह आज बढ़कर 4.50 लाख टन तक पहुंच गया है।
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नौणी विवि के कुलपति ने किया खुंब मेले में लगी प्रदर्शनी का शुभारंभ।
- फोटो : संवाद
विस्तार
मशरूम उत्पादन में भारत विश्व में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। देश में मशरूम उत्पादन 10 वर्ष पूर्व लगभग एक लाख टन था, वह आज बढ़कर 4.50 लाख टन तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों, उत्पादकों, उद्यमियों तथा उद्योगों को मशरूम उत्पादन और विपणन को बढ़ाने के लिए उपलब्ध आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए एक मंच पर आने की आवश्यकता है। साथ ही मशरूम की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक शोध की जरूरत है। यह कहना है डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा का। उन्होंने गुरुवार को खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन में 29वें राष्ट्रीय मशरूम मेले का शुभारंभ किया।
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उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए निदेशालय को बधाई दी और कहा कि सोलन को 10 सितंबर 1997 को मशरूम सिटी का नाम दिया गया था। विभाग की 29 वर्षों की यात्रा में मशरूम की खेती में नई तकनीकें और अनेक नवाचार देखने को मिले हैं, जिससे यह एक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बन गया है। इससे किसानों को दो से तीन माह की अल्प अवधि में ही अच्छी आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि गुच्छी और कीड़ाजड़ी जैसी जंगली मशरूम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए काम किया जाना चाहिए, क्योंकि इनके दाम लाखों में हैं। इससे किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी। इसके लिए अधिक से अधिक लोगों को मशरूम की खेती अपनाने के लिए जागरूक और प्रेरित करने का आह्वान किया गया।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री के निजी सचिव डॉ. अखिलेश एन मिश्रा ने कहा कि देश में मशरूम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने मशरूम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इसकी शेल्फ लाइफ सुधारने और बेहतर भंडारण तकनीकों पर जोर दिया। वहीं, आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने मशरूम के औषधीय गुणों और स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूकता फैलाने की बात कही। इससे पहले डीएमआर के निदेशक डॉ. बीएल अत्री ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों को साझा किया।
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पांच किसानों को प्रगतिशील मशरूम उत्पादक पुरस्कार
इस दौरान मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले देश के 5 प्रगतिशील किसानों को प्रगतिशील मशरूम उत्पादक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। इनमें गुरुग्राम (हरियाणा) के जय भगवान, पंचकूला (हरियाणा) के वीरेंद्र सिंह बाजवान, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) के योगेंद्र कुमार, गंजाम (ओडिशा) के ए बुलु राव और करीमगंज (असम) के सुभाशीष सरकार शामिल रहे।
किसान गोष्ठी में सुलझीं शंकाएं
मेले के दौरान लगी प्रदर्शनी में मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पादों की नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद आयोजित किसान गोष्ठी में वैज्ञानिकों ने किसानों को कंपोस्ट तैयार करने, कीट व रोग प्रबंधन और उन्नत किस्मों की जानकारी दी। इस दौरान कुपुक्षेत्र से आई शिवानी ने बताया कि मशरूम का नया प्लांट लगाना चाहती हूं। इसलिए मेले में जानकारी के लिए पहुंचीं। उड़ीसा से निर्मिता ने अपने नए प्लाट में कंपोस्ट और अन्य विषय को लेकर चर्चा की। हरियाणा, जम्मू, पंजाब, उड़ीसा, असम, बिहार से आए उत्पादकों ने अहम जानकारी हासिल की।