फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   stay-on-demolition-of-former-zila-parishad-president-house

Shimla News: पूर्व जिप अध्यक्ष के मकान को गिराने के फैसले पर रोक

Sun, 28 Jun 2026 01:17 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:17 AM IST
विज्ञापन
stay-on-demolition-of-former-zila-parishad-president-house
शिमला। जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष चंद्र प्रभा नेगी के न्यू शिमला स्थित भवन को तोड़ने के नगर निगम के आदेश पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। नगर निगम शिमला की ओर से भवन उपयोग बदलने के मामले में जारी किए गए आदेश को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की कोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निगम ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और प्राकृतिक न्याय की अनदेखी करते हुए फैसला सुनाया था।
विज्ञापन



न्यू शिमला स्थित चंद्र प्रभा नेगी के आवासीय भवन को व्यावसायिक गेस्ट हाउस में बदलने का नगर निगम ने आरोप लगाया था। अपीलकर्ता ने दलील दी कि निगम आयुक्त ने बिना पर्याप्त मौका दिए एकतरफा कार्रवाई करते हुए 20 अप्रैल 2024 को भवन तोड़ने के आदेश पारित कर दिए थे जो कि कानूनी रूप से गलत है। अपीलकर्ता ने कोई भी कानून और सैंक्शन प्लान नहीं तोड़ा था। यह एकतरफा आदेश कोविड काल में जारी किया गया था और उन्हें सुनवाई की तारीख का कोई नोटिस नहीं मिला था। बाद में 20 अप्रैल 2025 के आदेश में यह था कि अपीलकर्ता ने अनाधिकृत निर्माण किया है, जिसे हटाया नहीं गया है। जो नोटिस जारी किया गया था वह आवासीय भवन को व्यावसायिक गेस्ट हाउस में बदलने का था, जो गलत है। निगम का आरोप था कि उक्त भवन को आवासीय से व्यावसायिक गेस्ट हाउस में बिना अनुमति के परिवर्तित किया गया है। नगर निगम ने 20 अप्रैल 2024 को भवन तोड़ने के निर्देश जारी किए थे। निगम ने दलील दी कि अपीलकर्ता को 13 मार्च 2020 नोटिस भेजे गए थे, फिर भी वह पेश नहीं हुई थीं। इस तारीख को अपीलकर्ता को अनुपस्थित मानकर एकतरफा कार्रवाई की गई थी जबकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज या रिपोर्ट मौजूद नहीं था जो यह साबित कर सके कि अपीलकर्ता को उस तारीख की जानकारी थी।
विज्ञापन





कोर्ट ने माना कि आदेश में दर्ज करना कि अपीलकर्ता को व्यक्तिगत रूप से समन नहीं मिले थे, पूरी तरह गलत और रिकॉर्ड के तथ्यों के विपरीत है। कोर्ट ने पाया कि कई तारीखों पर सुनवाई का संचालन निगम आयुक्त के बजाय हियरिंग क्लर्क की ओर से किया गया था जो उचित और कानूनी नहीं है। कोर्ट ने निगम के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने निगम को आदेश दिया है कि अपीलकर्ता को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए और मामले का नए सिरे से निपटारा हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed