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महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है प्रदेश सरकार : समिति
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सीएम पर लगाया गुमराह करने का आरोप
ओपीडी शिफ्ट होने से महिलाओं को झेलनी होगी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने पर महिलाओं का विरोध बढ़ता जा रहा है।
महिलाओं का आरोप है कि सरकार उनके स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ कर रही है। ओपीडी को शिफ्ट करने के बाद प्राथमिकता से उपचार की सुविधा भी महिलाओं को नहीं मिल सकेगी। इस कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। सरकार ने अगर ओपीडी को शिफ्ट किया तो 16 अप्रैल को सड़कों पर महिलाएं उतरेंगी। समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और सचिव फालमा चौहान ने कहा कि महिलाओं को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू गुमराह कर रहे हैं। समिति के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मंगलवार को केएनएच ओपीडी शिफ्ट मामले को लेकर गलत बयान दिया है। ओपीडी को बचाने के शहर के विभिन्न जनसंगठनों के साथ सचिवालय तक मार्च निकाला जाएगा।
मुख्यमंत्री को यह तक पता नहीं कि प्रसूति और स्त्री रोग विभाग एक-दूसरे से मेल खाते हैं। ऐसे में वह गलत बयानबाजी कर रहे हैं। समिति ने मुख्यमंत्री की ओर से दिए बयान की निंदा भी की। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री को कुछ अधिकारी गुमराह कर रहे हैं। वह बिना किसी जानकारी के ओपीडी को शिफ्ट कर रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं मान रहे हैं कि केएनएच में अल्ट्रासाउंड मशीन काफी पुरानी है। प्रदेश में जो भी सरकारें रही हैं उन्होंने भी महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया है और नई मशीनों की सुविधाओं को अस्पताल में नहीं दिया है। आईजीएमसी में अगर गायनी की ओपीडी शिफ्ट होती है तो महिलाओं में संक्रमण के बढ़ने की संभावना भी अधिक हो जाएगी क्योंकि वहां पहले भीड़ रहती है।
आईजीएमसी में सुविधाओं का भी काफी अभाव है। सरकारी लैब में मशीनें तक बंद पड़ी हैं। क्रस्ना लैब में भीड़ होने के कारण तीसरे दिन मरीजों को रिपोर्ट मिल रही है। मेडिसिन, ऑर्थो और सर्जरी वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो मरीज दाखिल हैं। कमला नेहरू अस्पताल में महिलाओं को एक ही छत के नीचे एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड बैंक, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं, स्पेशल वार्ड की सुविधा मिलती है। समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार को महिला स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं है। सरकार का काम सिर्फ आदेश देना है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री झूठ कह रहे हैं कि कमला नेहरू अस्पताल में कोई विधायकों के आवास नहीं बनेंगे। यह सरेआम सरकार द्वारा झूठ फैलाया जा रहा है।
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ओपीडी शिफ्ट होने से महिलाओं को झेलनी होगी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने पर महिलाओं का विरोध बढ़ता जा रहा है।
महिलाओं का आरोप है कि सरकार उनके स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ कर रही है। ओपीडी को शिफ्ट करने के बाद प्राथमिकता से उपचार की सुविधा भी महिलाओं को नहीं मिल सकेगी। इस कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। सरकार ने अगर ओपीडी को शिफ्ट किया तो 16 अप्रैल को सड़कों पर महिलाएं उतरेंगी। समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और सचिव फालमा चौहान ने कहा कि महिलाओं को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू गुमराह कर रहे हैं। समिति के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मंगलवार को केएनएच ओपीडी शिफ्ट मामले को लेकर गलत बयान दिया है। ओपीडी को बचाने के शहर के विभिन्न जनसंगठनों के साथ सचिवालय तक मार्च निकाला जाएगा।
मुख्यमंत्री को यह तक पता नहीं कि प्रसूति और स्त्री रोग विभाग एक-दूसरे से मेल खाते हैं। ऐसे में वह गलत बयानबाजी कर रहे हैं। समिति ने मुख्यमंत्री की ओर से दिए बयान की निंदा भी की। साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री को कुछ अधिकारी गुमराह कर रहे हैं। वह बिना किसी जानकारी के ओपीडी को शिफ्ट कर रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं मान रहे हैं कि केएनएच में अल्ट्रासाउंड मशीन काफी पुरानी है। प्रदेश में जो भी सरकारें रही हैं उन्होंने भी महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया है और नई मशीनों की सुविधाओं को अस्पताल में नहीं दिया है। आईजीएमसी में अगर गायनी की ओपीडी शिफ्ट होती है तो महिलाओं में संक्रमण के बढ़ने की संभावना भी अधिक हो जाएगी क्योंकि वहां पहले भीड़ रहती है।
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आईजीएमसी में सुविधाओं का भी काफी अभाव है। सरकारी लैब में मशीनें तक बंद पड़ी हैं। क्रस्ना लैब में भीड़ होने के कारण तीसरे दिन मरीजों को रिपोर्ट मिल रही है। मेडिसिन, ऑर्थो और सर्जरी वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो मरीज दाखिल हैं। कमला नेहरू अस्पताल में महिलाओं को एक ही छत के नीचे एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड बैंक, ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं, स्पेशल वार्ड की सुविधा मिलती है। समिति की राज्य अध्यक्ष रंजना जरेट और सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार को महिला स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं है। सरकार का काम सिर्फ आदेश देना है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री झूठ कह रहे हैं कि कमला नेहरू अस्पताल में कोई विधायकों के आवास नहीं बनेंगे। यह सरेआम सरकार द्वारा झूठ फैलाया जा रहा है।
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