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हिमाचल में बढ़ रहा इस पक्षी का कुनबा, 8 नए मेहमान आए

Wed, 28 Feb 2018 12:12 PM IST
मोहन मेहता, अमर उजाला, ज्यूरी (रामपुर बुशहर)
मोहन मेहता, अमर उजाला, ज्यूरी (रामपुर बुशहर) Updated Wed, 28 Feb 2018 12:12 PM IST
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State bird of Himachal Pradesh Tragopan Jujurana increasing

दुनिया के इकलौते प्रजनन केंद्र सराहन में राज्य पक्षी जाजुराना (वेस्टर्न ट्रेगोपेन) का कुनबा बढ़ने लगा है। यहां दुर्लभ जाजुराना पक्षियों की संख्या 33 हो गई है। सराहन केंद्र में अब 8 नए मेहमान चहचहा रहे हैं। इनमें पांच का प्राकृतिक क्रिया और तीन का इनक्यूबेटर से जन्म हुआ है। यहां की आबोहवा भी इन्हें खूब रास आ रही है।

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दुनिया में विलुप्त हो रही इस प्रजाति को हिमाचल में बचाए रखने के खास प्रयास हो रहे हैं। इसी के चलते वर्ष 2007 में जाजुराना को राज्य पक्षी घोषित किया गया है। प्रजनन केंद्र आने वाले समय में इन पक्षियों को जंगलों में भी छोड़ने जा रहा है। जाजुराना के प्रजनन के लिए 2017 सबसे सफल वर्ष रहा है।
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सराहन स्थित पक्षीशाला विश्व का एकमात्र केंद्र है जहां जाजुराना को आम आदमी देख सकता है। अब यहां दोनों विधियों से सफल प्रजनन कराया जाता है। सराहन वन मंडलाधिकारी कुणाल अंग्रिश ने बताया कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है की आज जाजुराना की अच्छी संख्या मौजूद है।
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रोजमर्रा के कामकाज के लिए वन विभाग ने एक समर्पित टीम गठित की है, जो जंतुविज्ञानी नरसिम्हा के नेतृत्व में पक्षियों की देखभाल करती है। पक्षियों की सभी गतिविधियों पर उन्हें बिना परेशान किए सीसीटीवी से नजर रखी जाती है। नवजात चूजों के लिए यहां विशेष वातावरण तैयार किया गया है।

इनक्यूबेटर विधि से पहली बार हुआ सफल प्रजनन

State bird of Himachal Pradesh Tragopan Jujurana increasing

कुणाल अंग्रिश ने बताया कि इनक्यूबेटर विधि से जाजुराना के चूजों का जन्म विश्व में पहला सफल प्रयास है। इससे पहले ऐसा प्रयास दुनिया में कहीं नहीं हुआ है।

इस सफलता के आने वाले दिनों में और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। इस विधि से अंडे सेकने के लिए मादा जाजुराना की जरूरत नहीं होती है। मशीन ही सब कुछ करती है।

दुनिया भर में हैं मात्र 4500 जाजुराना
वेस्टर्न ट्रेगोपेन को दुनिया की सबसे विलुप्त प्राय प्रजाति का दर्जा प्राप्त है। दुनिया भर में मात्र 4500 जाजुराना हैं। इनका संरक्षण और प्रजनन कहीं नहीं हो रहा है। ट्रेगोपेन फैमिली पक्षी है। दुनिया में पांच प्रकार के ट्रैगोपैन हैं। पश्चिमी हिमालय में वेस्टर्न ट्रेगोपेन पाया जाता है। 

भोजन और सफाई का रहता है विशेष ध्यान
सूर्योदय के समय पक्षियों को विशेष रूप से तैयार भोजन दिया जाता है। इसमें कटे फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज आदि प्रचुर मात्रा में रहते हैं। इनके पिंजरों की विशेष सफाई पर ध्यान दिया जाता है। यह पक्षी किसी तरह का खलल बर्दाश्त नहीं करता है।

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