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स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू, शोरूम में ही होगा अब वाहनों का पंजीकरण

Fri, 13 Jul 2018 11:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 Jul 2018 11:28 AM IST
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Standard operating procedure Registration of vehicles in showroom  in Himachal

हिमाचल में खरीदे जाने वाले नए वाहनों का पंजीकरण अब शोरूम में ही हो जाएगा। वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद ही गाड़ी शोरूम से निकलेगी। गाड़ी लेने के बाद खरीदार को अब नंबर लेने के लिए एसडीएम और आरटीओ दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। न ही उन्हें दलालों को इसके लिए मोटी रकम देनी पड़ेगी।

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वीरवार को हिमाचल सरकार ने परिवहन विभाग में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत अब हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की जिम्मेदारी भी गाड़ी बेचने वाले एजेंसी के डीलरों की होगी। वाहनों में नंबर प्लेट के स्थान पर एप्लाइड फॉर लिखने की व्यवस्था खत्म हो गई है।
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जयराम सरकार ने एसडीएम और आरटीओ दफ्तर में नए वाहनों के पंजीकरण का काम कम करने के लिए शोरूम में ही ऑनलाइन वाहनों का पंजीकरण कराने का फैसला लिया है। वाहन पोर्टल पर नए वाहन के चैसी नंबर सहित होमोलोगेशन, गाड़ी के बनने की तारीख, निर्माता का नाम अपलोड किया जाएगा।

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बिना नंबर गाड़ी को हादसे पर नहीं मिलता क्लेम

Standard operating procedure Registration of vehicles in showroom  in Himachal

मौके पर ही वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवानी होगी। इसके अलावा टैक्स भी शोरूम में ही अदा करना होगा। उपभोक्ता इसका भुगतान क्रेडिट और डेबिट कार्ड से कर सकेंगे। वाहन पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए डीलरों को लॉगइन और पासवर्ड दिए जाएंगे।

डीलर को अलॉट की गई गाडि़यों के नंबर की सीरीज से ही वाहनों को नंबर जारी होंगे। अगर कोई वाहन मालिक अपनी पसंद का नंबर लेना चाहता है तो उसे मौके पर ही उसके लिए अतिरिक्त फीस देनी होगी। वाहन मालिक से लिए गए दस्तावेजों को 72 घंटे के भीतर डीलर को ऑनलाइन ही रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को भेजना होगा। मंजूरी मिलते ही गाड़ी को नंबर जारी होगा।

- हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की जिम्मेदारी भी डीलरों की होगी। 
- वाहनों में नंबर प्लेट के स्थान पर एप्लाइड फॉर लिखने की व्यवस्था होगी खत्म।

हादसा हो जाने पर बीमा शर्तों के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाडि़यों के मालिकों को बीमा क्लेम नहीं मिलता है। तकनीकी कारणों के चलते यह समस्या पेश आती है। बिना रजिस्ट्रेशन और नंबर प्लेट के गाड़ी चलाना अपराध भी है।

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