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हाटी एसटी दर्जा: अधिसूचना के 24 घंटे बाद ही स्थायी प्रमाण जारी

Wed, 03 Jan 2024 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन/कालाअंब (सिरमौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन/कालाअंब (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Wed, 03 Jan 2024 05:00 AM IST
सार

सिरमौर के पांवटा साहिब, संगड़ाह, श्रीरेणुकाजी, शिलाई और राजगढ़ में कई युवाओं ने एसटी के प्रमाण पत्र बनाए। 

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ST status: Permanent certificate issued only 24 hours after notification
एसटी का प्रमाण पत्र। - फोटो : संवाद

विस्तार

हाटी एसटी अधिसूचना जारी होने के 24 घंटे बाद प्रशासन ने कई युवाओं के स्थायी प्रणाम पत्र जारी कर दिए। सिरमौर के पांवटा साहिब, संगड़ाह, श्रीरेणुकाजी, शिलाई और राजगढ़ में कई युवाओं ने एसटी के प्रमाण पत्र बनाए। सोशल मीडिया पर भी युवाओं ने इस प्रमाण पत्रों को वायरल किया है। एसटी प्रमाण पत्रों के बनने से ट्रांसगिरि के युवाओं में खुशी का माहौल है। अब इन युवाओं को हर तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में जनजातीय प्रमाण पत्र का लाभ मिलेगा। साथ ही विभिन्न नौकरियों में आरक्षित कोटा का लाभ भी ले पाएंगे। बता दें कि सिरमौर जिला के हाटी समुदाय के लोग 1967 में जब तत्कालीन उत्तर प्रदेश के जौनसार बावर को जनजातीय दर्जा मिला था। तब से लेकर 2023 तक 56 वर्षों तक लगातार संघर्ष किया। पांच माह पूर्व केंद्र सरकार ने हाटी समुदाय को एसटी आरक्षण प्रदान करने अधिसूचना जारी की थी। बीते सोमवार को प्रदेश सरकार ने भी केंद्र से स्पष्टीकरण मिलने के बाद इस अधिसूचना को जारी कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने अभ्यर्थियों को प्रमाण पत्र जारी करने शुरू कर दिए हैं।

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केंद्र की फटकार के बाद एसटी की अधिसूचना की जारी : बरागटा
 भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता चेतन बरागटा ने कहा है कि राष्ट्रपति की ओर से हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा दिए जाने वाला कानून पास होने के बाद भी उसे पांच महीने तक लटकाए रखना प्रदेश कांग्रेस की हाटी समुदाय के प्रति नकारात्मक सोच को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार की तरफ से प्रदेश सरकार को इस मामले में फटकार लगी तो आनन-फानन में प्रदेश की कांग्रेस सरकार अधिसूचना जारी कर दी। बरागटा ने हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा दिए जाने की अधिसूचना जारी होने पर सभी को बधाई दी। छह दशक से ज्यादा लंबी लड़ाई आज निर्णायक स्थिति में पहुंची और हाटी समुदाय को उनका हक मिला। हाटी समुदाय को जनजातीय घोषित करने से इस क्षेत्र की ढाई लाख लोग लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि हाटी समुदाय को उनका हक दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का विशेष योगदान रहा। चेतन बरागटा ने कहा कि कांग्रेस ने हाटी समुदाय को उनके हक से दूर रखने का हरसंभव प्रयास किया। 

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प्रदेश सरकार को न्यायालय के फैसले का करना चाहिए था इंतजार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाटी आरक्षण बिल की अधिसूचना एक जनवरी को जारी कर दी है। इसे लेकर गुर्जर समुदाय ने नाराजगी जताई है। गुर्जर समुदाय का कहना है कि हाटी आरक्षण बिल से अनुसूचित जाति वर्ग को बाहर निकाल दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या गिरिपार क्षेत्र को जनजाति क्षेत्र घोषित किया गया है या फिर इस बिल के तहत केवल सवर्ण जातियों को ही आरक्षण दिया है? जो आरक्षण और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।

जिला सिरमौर गुर्जर समाज कल्याण परिषद के अध्यक्ष राजकुमार पोसवाल, महामंत्री सोमनाथ भाटिया और हिमाचल प्रदेश गुर्जर समाज के प्रधान हेमराज राव ने बताया कि उक्त मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर बहस पूरी हो चुकी है। सिर्फ फैसला आना बाकी है तो प्रदेश सरकार को उसका इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि न्यायालय का फैसला सभी को स्वीकार्य है। सरकार और हाटियों को भी होना चाहिए। न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए। ऐसा लग रहा है कि सरकार और हाटियों का न्यायालय और कानून व्यवस्था से विश्वास उठ गया है, जो इतनी जल्दबाजी में अधिसूचना लागू की गई।

इसको लेकर न केवल प्रदेश के गुर्जर समाज बल्कि साथ लगते राज्यों हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के गुर्जर समाज में भी रोष है। इसके विरोध में किसान आंदोलन की तर्ज पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में भी गुर्जर समाज लोकसभा चुनाव और 36 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के खिलाफ मतदान करेगा। प्रदेश सरकार को अधिसूचना लागू करने से पूर्व गुर्जर समाज से एक बार बात करनी चाहिए थी। ऐसा न कर सरकार ने साबित कर दिया कि सभी राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित हैं।

एसटी दर्जें की अधिसूचना रद्द करें : रवि
वहीं, भीम आर्मी भारत एकता मिशन के हिमाचल प्रदेश संयोजक रवि कुमार की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हाटी समुदाय को जनजातीय का दर्जा दे दिया गया है जबकि इस क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश लोग उच्च वर्ग से संबंध रखते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय दर्जा मिलने से वहां एससी, एसटी एक्ट निरस्त हो जाएगा। कानून के न रहने के कारण अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार बढ़ जाएगा। उन्होंने इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग उठाई। रवि ने कहा कि प्रदेश सरकार वन मित्रों की भर्ती कर रही है। इस भर्ती में ईडब्ल्यूएस, आईआरडीपी से संबंधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। अनुसूचित जाति काे आरक्षण न देकर सरकारी नौकरियां से दूर रखा जा रहा है। यह संवैधानिक नियमों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में ज्यादातर एससी, एसटी एट्रोसिटी मामलों में पुलिस कैंसिलेशन रिपोर्ट बनती है, इस कारण प्रदेश का अनुसूचित जाति समाज न्याय से वंचित हो जाता है। उनको न्याय पाने के लिए अदालत के दरवाजे तक नहीं पहुंचने दिया जाता। रवि कुमार ने कहा कि हिमाचल के अनुसूचित जाति के युवाओं को वर्ष 2002 से सरकारी नौकरियों में लंबित रोस्टर बैकलॉग से भी वंचित रखा है। हिमाचल में ज्यादातर अनुसूचित जाति वर्ग के लोग भूमिहीन हैं। इसके चलते उनके लिए जीवन का निर्वाह करना, बच्चों का पालन करना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई अनुसूचित जाति वर्ग के लोग भूमि नहीं होने के कारण घर बनाने तक में असमर्थ हैं। नगर निगम और परिषदों में वाल्मीकि समुदाय के लोगों को नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद खाली पदों को भरा नहीं जा रहा है, उनके स्थान पर ठेके पर लोग रखे जा रहे हैं। रवि कुमार ने राज्यपाल से सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया।

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