फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Sports grounds in the capital have shrunk, and youth are addicted to drugs.

Shimla News: राजधानी में सिमट गए खेल मैदान, नशे की गिरफ्त में युवा

Wed, 19 Nov 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Nov 2025 11:59 PM IST
विज्ञापन
Sports grounds in the capital have shrunk, and youth are addicted to drugs.
एक्सक्लूसिव...
विज्ञापन

शहर में 15 साल में खेल मैदानों की संख्या में 38 फीसदी तक घटी, छोटे-छोटे खेल मैदानों की जगह अब बन गए भवन
तीन हजार परिवारों पर हुए सर्वे में खुलासा
हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी के युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसका बड़ा कारण खेल मैदानों की लगातार घटती संख्या मानी जा रही है। शहर में पहले जो स्थान युवाओं के खेलने-कूदने के लिए खाली वहां अब भवन और पार्किंग बन गई हैं। मैदानों और खेलकूद के लिए बने स्थानों की संख्या 15 साल में 38 फीसदी तक घटी है।

यह चौंकाने वाला खुलासा श्यामला शैक्षणिक एवं सामाजिक कल्याण ट्रस्ट के सर्वे में हुआ है। राजधानी के करीब तीन हजार परिवारों के सर्वे के बाद तैयार की रिपोर्ट के अनुसार शहर में खेल मैदानों की संख्या में लगातार घट रही है। इस वजह से युवाओं में नशे की लत बढ़ी है। कई मोहल्लों में जो छोटे खेल स्थल पहले बच्चों और किशोरों की रोजमर्रा की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा थे वह अब पार्किंग या निर्माणाधीन ढांचों से घिर चुके हैं जिससे युवाओं के पास खेल और सुरक्षित गतिविधियों का विकल्प लगभग समाप्त होता जा रहा है।
विज्ञापन


साथ ही 2010 से 2024 के बीच नशा अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में लगभग 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें प्रतिबंधित दवाओं से नशा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर में जब्त किए नशे की सामग्री में चिट्टे की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक हो गई है और सिंथेटिक दवाएं भी छात्रों तक आसानी से पहुंचने लगी है। सर्वे में दिखाया है कि जिन वार्डों में मैदान कम हुए वहां नशे से संबंधित शिकायतें अधिक हैं। रिपोर्ट में दर्ज प्रतिक्रियाओं में भी लोगों ने नशे का कारण खेल मैदानों की कमी को बताया। लोगों का कहना है कि खेल मैदानों की कमी के कारण युवा खेलों के बजाय नशे की तरफ बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार खेल मानसिक तनाव कम करते हैं और युवाओं में अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं लेकिन मैदानों का लगातार खत्म होना उन्हें खालीपन की ओर धकेल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन



मैदानों की कमी डाल रही गलत असर
सर्वे में शामिल शिक्षकों और अभिभावकों ने माना कि खेल मैदानों का सिमटना बच्चों की दिनचर्या और मानसिक संतुलन पर नकारात्मक असर डाल रहा है। मैदान जहां समाप्त हुए वहां विद्यार्थियों में तनाव और असामाजिक प्रवृत्तियों में बढ़ोतरी दिखाई दी है। रिपोर्ट बताती है कि सिंथेटिक ड्रग्स के उपयोग में बढ़ोतरी का पैटर्न उन इलाकों में अधिक दिखाई दिया जहां पिछले एक दशक में खेल स्थल 50 प्रतिशत तक घटे हैं। ऐसे क्षेत्रों में पुलिस ने लगातार अभियान चलाए हैं और कई जगहों पर स्कूल जाने वाले छात्रों तक पैडलरों की पहुंच देखी गई है।




कोट
नशे की बढ़ती चुनौती को केवल जागरूकता या दंडात्मक कदमों से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए शहर में खेल संस्कृति को फिर से मजबूत करना जरूरी है। खेल सुविधाएं युवाओं के लिए सुरक्षा कवच हैं और शिमला में मैदानों का संरक्षण अब तत्काल आवश्यकता है। राज्यपाल तक भी यह रिपोर्ट पहुंची है और उन्होंने इसका संज्ञान लिया है।
-नितिन व्यास, प्रोफेसर, हिमाचल विश्वविद्यालय
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article