कालका-शिमला एनएच पर पहाड़ों को दरकने से बचाएगी विशेष घास
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कालका-शिमला हाईवे पर फोरलेन के लिए पहाड़ों की कटिंग के कारण भूस्खलन को रोकने के लिए अब विशेष प्रकार की घास (अंज, मुंज व एलेफन) उगाई जाएगी। देहरादून से लाए गए बीज से उगने वाली घास की जड़ें पहाड़ों को दरकने से रोकने में मदद करेगी। फोरलेन निर्माण कंपनी जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी पहाड़ों पर बीस हजार बीज डालेगी। खास बात यह है कि कोई भी जानवर इस घास को खा नहीं सकते।
फोरलेन कंपनी के डिप्टी मैनेजर उमेश कुमार ने बताया कि जियोलॉजिस्ट की सलाह के अनुसार पहाड़ों से भूस्खलन रोकने के लिए बीज डाले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि फोरलेन में निचली ओर लगाई जा रही वॉल में भी यह बीज डाला जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बरसात के मौसम में एनएच पर भारी भूस्खलन होने के कारण काफी नुकसान हुआ है। एनएच पर भूस्खलन के कारण कंपनी को 24 घंटे पहाड़ों की निगरानी करनी पड़ रही है।
मिट्टी को खिसकने नहीं देतीं मजबूत जड़ें
बारिश के चलते जगह-जगह पहाड़ दरक रहे हैं। अब कंपनी ने जियोलॉजिस्ट की सलाह के बाद पहाड़ों को दरकने से बचाने के लिए बीज डालना शुरू किया है। बताया जा रहा है कि अभी केवल उन पहाड़ों पर इन बीजों को डाला जाएगा, जिनके दरकने का अधिक खतरा बना हुआ है।
नेशनल हाईवे पर अंज, मुंज व एलेफन ग्रास के बीज पहाड़ों पर बोए जा रहे हैं। इन बीजों की खासियत यह है कि बीज से निकलने वाली जड़ें इतनी मजबूत होती हैं कि वह मिट्टी को जल्द खिसकने नहीं देती। इससे नेशनल हाईवे पर हो रहे भूस्खलन को रोकने में काफी मदद मिलेगी।