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Research: कैंसर की कोशिकाओं को फैलने से रोकती है सोयाबीन, विभिन्न संस्थानों के शोध में हुआ खुलासा

Mon, 24 Mar 2025 11:04 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 24 Mar 2025 11:04 AM IST
सार

चितकारा विश्वविद्यालय कालूझिंडा के चितकारा अनुसंधान और विकास केंद्र के विशेषज्ञ सहित  विभिन्न संस्थानों के शोध अध्ययनकर्ताओं ने किया है। 

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Soybean prevents cancer cells from spreading, research done by various institutes including HPU revealed
सोयाबीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोयाबीन में कैंसर रोधी क्षमता होती है। इसमें पाया जाने वाला जेनिस्टिन कीमोथैरेप्यूटिक दवा का काम करता है। यह खुलासा चितकारा विश्वविद्यालय कालूझिंडा के चितकारा अनुसंधान और विकास केंद्र के विशेषज्ञ सहित  विभिन्न संस्थानों के शोध अध्ययनकर्ताओं ने किया है। इस शोध अध्ययन में अफगानिस्तान के काबुल का एक विश्वविद्यालय भी शामिल हुआ है। इस अध्ययन के अनुसार जेनिस्टिन सोयाबीन में पाया जाने वाला एक प्रचुर मात्रा में आइसोफ्लेवोनोइड है। जेनिस्टिन विभिन्न प्रकार के कैंसर के खिलाफ एक कीमोथैरेप्यूटिक दवा के रूप में कार्य करता है। मुख्य रूप से यह एपोप्टोसिस यानी कोशिका मृत्यु की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। सेल चक्र और एंजियोजेनेसिस यानी नई रक्त वाहिकाओं के बनने या विकास को संशोधित करता है। यह मेटास्टेसिस को दबाता है।

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मेटास्टेसिस कैंसर कोशिकाओं का एक अंग या ऊतक से दूसरे अंग या ऊतक में फैलने को कहते हैं। अध्ययन के अनुसार जेनिस्टिन ने महिलाओं में कई परिणाम दर्शाए हैं। स्त्री रोग संबंधी कैंसर की प्राथमिक श्रेणियां गर्भाशय ग्रीवा, डिंबग्रंथि, गर्भाशय, योनि और वल्वर कैंसर हैं। डिंबग्रंथि के कैंसर पर जेनिस्टिन के सटीक तंत्र को समझना स्तन कैंसर विरोधी उपचार में भी योगदान दे सकता है। सोयाबीन से प्राप्त जेनिस्टीन की आणविक क्रिया अतिरिक्त जांच से कैंसर की दवा के विकास में मदद मिल सकती है।

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इन संस्थानों और विशेषज्ञों ने किया संयुक्त अध्ययन
चितकारा विवि, चंडीगढ़ विवि मोहाली का जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, उत्तरांचल विवि देहरादून का अनुप्रयुक्त और जीवन विज्ञान स्कूल, लक्ली प्रोफेशनल विवि फगवाड़ा का फार्मास्युटिकल विज्ञान स्कूल, सविता चिकित्सा और तकनीकी विज्ञान संस्थान चेन्नई के वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र और अफगानिस्तान के करदान विश्वविद्यालय परवाने डू काबुल के अर्थशास्त्र विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से किया है।

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