एसएमसी शिक्षकों ने लिया बड़ा फैसला, सरकार को दिया अल्टीमेटम
सरकार की अनदेखी से तंग आकर चार हजार एसएमसी शिक्षकों ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। शिक्षकों ने 15 सितंबर तक सरकार को अल्टीमेटम देते हुए स्थायी नीति बनाने की मांग की है। अगर 15 तक सरकार फैसला नहीं करती है तो शिक्षक और उनके परिवार कांग्रेस का बहिष्कार कर देंगे।
इसके अलावा 15 सितंबर के बाद शिक्षक सरकार के खिलाफ क्रमिक अनशन भी शुरू करेंगे। शुक्रवार को राजधानी शिमला में प्रेस वार्ता कर पीरियड बेसिस एसएमसी शिक्षक संघ ने कांग्रेस सरकार पर बीते पांच साल के दौरान शिक्षकों को शोषण करने का आरोप लगाया।
संघ के महासचिव मनोज रौंगटा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत नोट की फाइल को अफसरशाही ने बंद कर दिया। मुख्यमंत्री ने कई बार सार्वजनिक तौर पर एसएमसी शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाने की घोषणा की लेकिन सचिवालय में बैठे अफसरों ने फाइल को आगे नहीं बढ़ने दिया।
कोर्ट जाने की तैयारी
मनोज रौंगटा ने बताया जुलाई 2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने एसएमसी पॉलिसी बनाते हुए 257 शिक्षकों की नियुक्ति की। शिक्षकों को दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती दी गई। सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस सरकार ने दुर्गम क्षेत्र की शर्त हटाते हुए सामान्य क्षेत्रों में भी एसडीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर करीब तीन हजार शिक्षकों को नौकरी दी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई स्कूल एसएमसी शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों में नियमित शिक्षक सेवाएं देने को तैयार नहीं होते। ऐसे स्कूलों में एसएमसी शिक्षक पढ़ा कर बेहतर परीक्षा परिणाम दे रहे हैं। महासचिव मनोज रौंगटा ने बताया कि एसएमसी शिक्षक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को पूरा करते हैं।
जब सरकार पैट, पैरा और पीटीए को लाभ दे रही है तो हमारे साथ क्यों पक्षपात किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एमएमसी शिक्षकों को छुट्टियों का कोई प्रावधान नहीं है। नाममात्र की मानदेय में बढ़ोतरी कर सरकार शिक्षकों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ही हमारे पक्ष में फैसला नहीं लिया तो संघ कोर्ट जाने को विवश होगा।