फिर कैबिनेट में जाएगा साढ़े आठ लाख विद्यार्थियों की स्मार्ट वर्दी का मामला
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले साढ़े आठ लाख विद्यार्थियों को दी जाने वाली स्मार्ट वर्दी का मामला फिर कैबिनेट में जाएगा। विधानसभा के शीत सत्र के दौरान धर्मशाला में 11 दिसंबर को कैबिनेट बैठक होगी। इसमें तय होगा कि स्कूल वर्दी के टेंडर रद्द होंगे या खरीद की जाएगी। इससे पहले भी दो बार स्मार्ट वर्दी का मामला कैबिनेट में जा चुका है। अफसरशाही की लेटलतीफी के चलते इस शैक्षणिक सत्र में वर्दी का आवंटन नहीं हो सकेगा।
अब नए साल में भी वर्दी स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगी। शिक्षा विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम के अधिकारियों की कारगुजारी के चलते स्मार्ट वर्दी की खरीद का मामला सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। दोनों विभागों के मंत्री भी इस मामले को लेकर गंभीर नहीं हैं। बीते माह हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री वर्दी खरीद में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। वर्दी खरीद में देरी के चलते सरकार खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक का तबादला भी कर चुकी है। बावजूद इसके अधिकारी अभी तक खरीद को लेकर अंतिम फैसला नहीं ले पाए हैं। अब दोबारा से स्मार्ट स्कूल वर्दी की फाइल कैबिनेट में जा रही है।
शिक्षा विभाग और खाद्य आपूर्ति निगम के अधिकारी स्मार्ट वर्दी की खरीद में हो रही देरी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से पहली अगस्त को शिक्षा सचिव को मामले की फाइल भेजी गई थी। शिक्षा सचिव ने 14 अगस्त को फाइल शिक्षा मंत्री को भेजी। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।
सरकार ने इस बार एक साथ तीन साल के लिए वर्दी खरीद का फैसला लिया है। इस पर करीब 174 करोड़ का खर्च आना प्रस्तावित है। निगम ने ई टेंडरिंग के माध्यम से टेंडर आमंत्रित किए हैं। एल वन कंपनी से रेट कम करने को लेकर नेगोशिएशन भी हो चुकी है, लेकिन अब दोनों विभागों के बीच रेट को लेकर मतभेद खड़े हो गए हैं। इसका खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।