स्कूल बस हादसा: दो परिवारों के बुझ गए चिराग, मां-बाप खो बैठे सुध-बुध
निजी स्कूल बस हादसे में दो परिवारों के दो-दो चिराग एक साथ बुझ गए। माइना के राजकुमार और रजाणा के विजेंद्र को दोहरे जख्म मिले। इनके बच्चे स्कूल गए थे लेकिन न स्कूल पहुंचे और न घर लौट पाए। विजेंद्र की पत्नी चंद्रकला ने सुबह दोनों बच्चों अभिषेक और संजना को तैयार कर स्कूल भेजा। दोनों ही मासूम चंद दूरी पर बस हादसे का शिकार हो गए। विजेंद्र सिंह के अन्य तीन बच्चे हादसे से अंजान हैं। दोनों बच्चों की मौत से मां-बाप अपने सुध-बुध खो बैठे हैं।
रजाणा के ही एक अन्य बच्चे नैतिक की भी इस हादसे में मौत हुइ है। तीन बच्चों की एक साथ मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। हादसे से ठीक एक दिन पहले भी रजाना के निकट ही एक टिपर हादसे में दो लोगों की जान चली गई थी। माइनाबाग गांव के रातकुमार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। समीर और आरुषि की मौत हो गई है जबकि रक्षिता अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है।
पूरा परिवार बदहवास है। दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार पालने वाले राजकुमार के तीन बच्चे डीएवीएन स्कूल ददाहू पढ़ने जाते थे। रोजाना तीनों बच्चे स्कूल बस से ही सफर करते थे। शनिवार सुबह भी राजकुमार के लख्ते जिगर स्कूल के लिए तैयार हुए और बस में बैठकर स्कूल जा ही रहे थे कि दर्दनाक हादसा हो गया। परिवार को रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं, माइना में शोक की लहर दौड़ गई है।
तीन से 14 साल तक के मासूम थे सवार
बस में तीन साल के एलकेजी से लेकर नौवीं कक्षा तक के बच्चे सवार थे। प्रतिदिन यह बच्चे इसी बस से स्कूल और घर पहुंचते थे। खड़कोली, खेगुआ, रजाना, कांडो, माइना आदि क्षेत्रों से बच्चे ददाहू स्कूल जाते थे।
जोगर खड्ड और गिरि नदी किनारे जलीं चिताएं
ददाहू के निकट जोगर खड्ड किनारे बस चालक रामस्वरूप व नौवीं कक्षा के छात्र कार्तिक (14) की चिताएं एक साथ जलीं। दूसरी कक्षा के छात्र आदर्श शर्मा का ददाहू की गिरि नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया गया। हादसे के बाद सभी मृतकों के परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। संगड़ाह पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी है।
पैरापिट या क्रैश बैरियर होता तो बच जाती मासूमों की जान
जिला की सड़कें लोगों के खून की प्यासी बन गई हैं। आए दिन बढ़ रहे सड़क हादसों में लोगों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रेणुका-हरिपुरधार मार्ग पर बढ़ रहे सड़क हादसों में कई लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं। बीते साल भी इस मार्ग पर नौ लोग काल का ग्रास बने थे। शनिवार को हुए बस हादसे में भी सात मासूमों और एक चालक की जान चली गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि खाई में गिरते ही बस के परखच्चे उड़ गए।
सड़क किनारे पैरापिट व क्रैश बैरियर तक नहीं बने थे। यदि सड़क पर पैरापिट या क्रैश बैरियर होते तो शायद मासूम बच्चों की जान को बचाया जा सकता था। प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर बढ़ते सड़क हादसों को लेकर लोक निर्माण विभाग गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। हादसों के बाद जांच करके विभाग की योजनाओं को भी फाइलों में बंद कर दिया जाता है।
रेणुका-हरिपुरधार मार्ग पर संगड़ाह तक कम ही पैरापिट देखने को मिलते हैं। हादसे वाले स्थल खड़कोली के आसपास कई किलोमीटर का क्षेत्र, दनोई से ददाहू तक छह किलोमीटर की सड़क पर कम ही पैरापिट नजर आते हैं। खड़कोली का क्षेत्र कई लोगों का जीवन छीन चुका है। इतना सब होते हुए भी लोक निर्माण विभाग की नींद नहीं टूट पाई है।
इस सड़क पर दर्जनों ब्लैक स्पॉट होने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रतन चंद शर्मा ने बताया कि जहां बस हादसा हुआ है, वहां सड़क की चौड़ाई साढ़े छह मीटर के करीब है। हादसे का कारण पैरापिट या क्रैश बैरियर का न होना नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी ब्लैक स्पॉट पर क्रैश बैरियर लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जोरदार धमाके के साथ 500 फीट गरी खाई में जा गिरी स्कूल बस
हर रोज की तरह तैयार होकर मासूम बच्चे स्कूल के लिए बस में जा रहे थे। ददाहू-संगड़ाह सड़क पर खड़कोली के समीप एक मोड़ पर अचानक जोरदार धमाका हुआ और बस 500 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इसके बाद खड़कोली से ददाहू और नाहन तक चीख-पुकार मच गई। घायल बच्चे दर्द से कराहते हुए अपने मम्मी-पापा को पुकारते रहे। रोते-बिलखते घायल बच्चों को कराहता देख यहां कर किसी का दिल दहल उठा।
रविवार से स्कूलों में छुट्टियां न होतीं तो बस में बच्चों की संख्या और अधिक होती। शनिवार को सुबह के समय मौसम खराब होने की वजह से भी कुछेक बच्चे घरों से नहीं आए। यहां तक कि बस हादसे का शिकार हुए चालक रामस्वरूप के बच्चे भी प्रतिदिन इसी बस से स्कूल आते थे, लेकिन शनिवार को दोनों ने स्कूल आने से इनकार कर दिया था। उधर, हादसे के बाद लोगों के फोन घनघनाने शुरू हो गए। कुछ एक बच्चों को निजी वाहनों से नाहन भेजा जा चुका था। इस कारण कई अभिभावक अपने मासूमों से नहीं मिल पाए।
ददाहू अस्पताल में जहां-तहां अभिभावकों की चीख पुकार से सबका दिल दहल गया। नाहन में बच्चों के रोने की आवाजों से वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर्र आइं। घायल बुजुर्ग सुंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने बस में लिफ्ट ली थी। अचानक जोर का धमाका हुआ और बस खाई में गिर गई। उन्हें पता ही नहीं चला। ऐसा लगा जैसे उन्हें किसी ने उठाकर बस से बाहर फेंक दिया। गाड़ी की गति भी अधिक नहीं थी। मोड़ पर न जाने बस कैसे गिर गई।
बार-बार खराब होती थी बस, कई बार हुए लेट
घायल बच्चों और उनके अभिभावकों ने कहा कि बस अक्सर खराब हो जाती थी। कई बार बच्चे देरी से भी पहुंचते थे। अभिभावक रघुवीर ने बताया कि हादसे में उनके भाई का बच्चा भी घायल हुआ है। बस बार-बार खराब होती थी। कई बार स्कूल के बच्चे देरी से घर पहुंचते थे। हादसा क्यों हुआ, इसकी वजह का पता नहीं चल पाया है। स्कूल संचालक देवेंद्र गोयल ने कहा कि उनकी बस ठीक थी। उन्होंने अपने बच्चों को खोया है। उन्हें इसका दुख है। गाड़ी के तमाम दस्तावेज थे। फिटनेस सर्टिफिकेट भी था। जहां तक बस लेट होने की बात है कई बार जाम, सड़क बंद होने और बीच में ट्रक खराब होनी की वजह से हुई है। चालक को निर्देश दिए थे कि अगर बस में तकनीकी खराबी आती है तो उसे वहीं पर खड़ी कर दे।
रजाणा से बच्चों को लेकर आती थी बस
दयानंद आदर्श विद्या निकेतन (डीएवीएन) स्कूल ददाहू की यह बस रजाणा से बच्चों को लेकर आती थी। रजाणा, माइना, माइना बाग, घाटों, थाना खेगुआ आदि इलाकों से बच्चों को लेकर यह बस ददाहू पहुंचती थी।