सिविल जज बनकर रेस्ट हाउस में ठहरे, पुलिस ने जांच की तो सामने आया सच
प्रदेश में आचार संहिता लगने से चुस्त हुए प्रशासन ने खुद को जज बताकर रेस्ट हाउस में ठहरे व्यक्ति को उसके चालक समेत काबू कर लिया। सिविल जज बताकर आरोपी न केवल रेस्ट हाउस के कमरे में ठाठ से ठहरे बल्कि पुलिस को ओहदे की धौंस दिखाकर सुरक्षा की मांग भी कर डाली।
संदेह होने पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान पंजाब के जालंधर नकोदर चौक अवतार नगर निवासी जितेंद्र कांडा (35) पुत्र पवन कुमार(25) और रामचंद्र पुत्र भूषण निवासी सिंगपुरा भंगानी के रूप में हुई है। दोनों आरोपी चचेरे भाई बताए जा रहे हैं।
आरोपी ने खुद को जेएमआईसी इलाहाबाद बताकर पहले तहसीलदार राजकुमार को कॉल कर डीएसपी पांवटा का मोबाइल नंबर मांगा। फिर जिलाधीश सिरमौर को भी कॉल की। जिला चुनाव अधिकारी और जिलाधीश सिरमौर के माध्यम से आरोपी को लोक निर्माण विभाग पांवटा के रेस्ट हाउस में कमरा दे दिया गया।
ऐसे हुआ खुलासा
विश्राम गृह में कमरा मिलने पर आरोपी ने स्थानीय डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान के मोबाइल पर कॉल कर दो सुरक्षा कर्मी तैनात करने को कहा। रेस्ट हाउस से थाने में पहुंच कर पुरुवाला सर्विस स्टेशन पर अभद्र व्यवहार की बात भी कही।
संदेह होने पर पुलिस ने इलाहाबाद संपर्क किया तो पता चला कि वहां पर इस नाम को कोई जज है ही नहीं। पूछताछ में युवक अपना पहचान पत्र नहीं दिखा सके। वह अपने आप को कभी पटियाला तो कभी इलाहाबाद का बताने लगे। सख्ती करने पर आखिरकार फर्जी जज व चालक ने सारी बातें सच बता दीं।
पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जांच शुरु कर दी है। उधर, डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने बताया कि पंजाब निवासी व्यक्ति ने खुद को कभी पटियाला तो कभी इलाहाबाद काज बता कर रेस्ट हाउस में कमरा बुक करवा लिया। संदेह होने पर जांच की गई तो सिविल जज होने का दावा फर्जी निकला।