जाठियादेवी में सैटेलाइट टाउन बनाने से पीछे हट गई सिंगापुर सरकार, ये है वजह
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कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के सबसे बड़े प्रोजेक्टों में से एक जाठिया देवी प्रोजेक्ट को शुरू करने से सिंगापुर सरकार पीछे हट गई है। इसके पीछे तर्क दिया है कि एनजीटी के फैसले के अनुसार ढाई मंजिला भवन बनने से घाटे का सौदा होगा।
जब तक ग्रीन ट्रिू्ब्यूनल से अतिरिक्त मंजिल बनाने की राहत नहीं मिलती, तब तक इस प्रोजेक्ट का काम शुरू नहीं किया जा सकता। अब प्रदेश सरकार भी इस प्रोजेक्ट को शुरू करने में जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहती है।
हिमुडा ने कॉलोनियां बनाने को जाठिया देवी में 300 बीघा जमीन खरीदी है। सरकार की एजेंसी हिमुडा के पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने स्तर यहां कॉलोनियों का निर्माण कर सके। ऐसे में प्रदेश सरकार ने सिंगापुर सरकार की भवन निर्माण एजेंसी के साथ एमओयू साइन किया।
इस कारण पीछे हटी सिंगापुर सरकार
इसमें जमीन हिमाचल सरकार की और कॉलोनियां बनाने का जिम्मा सिंगापुर सरकार का होगा। कॉलोनियां बनाने के बाद जितने फ्लैट बनेंगे, उसमें दोनों सरकार की बराबर की हिस्सेदारी होगी, लेकिन काम शुरू करने से पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शिमला प्लानिंग एरिया में चार मंजिला भवन बनाने के बजाय
ढाई मंजिल तक भवन बनाने के आदेश जारी किए। इस कारण सिंगापुर सरकार प्रोजेक्ट को शुरू करने से फिलहाल पीछे हट गई है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास) तरुण कपूर ने कहा कि सरकार इस मामले में एनजीटी में फिर पुनर्विचार याचिका दायर करने जा रही है। ढाई मंजिला भवन बनाए जाने से हिमाचल और सिंगापुर दोनों सरकार के लिए यह घाटे का सौदा होगा।