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सिक्किम की ‘धारा विकास पहल’ पर पूरे देश में होगा काम
Fri, 15 Mar 2019 10:54 AM IST
अरविन्द ठाकुर
हरीश चंद्र, अमर उजाला, धर्मशाला
हरीश चंद्र, अमर उजाला, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 15 Mar 2019 10:54 AM IST
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देश के सभी पहाड़ी राज्यों में सिक्किम की तर्ज पर पानी के चश्मों को बचाने के लिए काम होगा। जिस प्रकार सिक्किम प्रदेश ने पिछले दस सालों में पानी के चश्मों को विकसित करने के लिए धारा विकास पहल शुरू की, उसी तरह अब देश के अन्य राज्यों भी इस मॉडल पर काम करेंगे।
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धर्मशाला में केंद्रीय जल संशासन मंत्रालय की कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों ने सिक्किम के धारा विकास पहल की सराहना की। कार्यशाला में सिक्किम प्रदेश की मनरेगा परियोजना निदेशक कम अतिरिक्त सचिव सारिका प्रधान ने अपने प्रदेश में चश्मों को बचाने के लिए विकसित मॉडल पेश किया।
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इसमें उन्होंने मनरेगा के तहत गांव स्तर पर पानी के चश्मों को बचाने के लिए किए कामों की जानकारी दी। कहा कि पंचायत की ग्राम सभा और पंचायत समिति के माध्यम से भी पानी के चश्मों को विकसित करने की दिशा में काम किया गया है।
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उन्होंने एक जंगल क्षेत्र की झील को संरक्षित करने को उदाहरण भी दिया। इसमें झील के तीन चित्र में दिखाए गए, जो झील कभी सुख गई थी आज वह पानी से भरी है।
मनरेगा के तहत होगा भूतल जल संरक्षण
कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र एसीडब्ल्यूएडीएएम के हिमांशु कुलकर्णी, कर्नाटक अर्घ्यम के विश्वदीप घोष, सर्वे ऑफ इंडिया के एसके सिन्हा, चिराग उतराखंड के डॉ बद्रीश मेहरा और भुपाल बिष्ठ, जम्मू विश्वविद्यालय के डॉ एके तल्लूर ने भी अपनी संस्था और संस्थान के शोध कार्य सबके सामने रखे।
दूसरे सत्र में डॉ एसके भारतार्या, डॉ सुनेश शर्मा, अल्बर्ट नगुउले, वैभव गोसाई, डॉ जी शर्मा और साइकत पाल ने शोध कार्य पेश किये। अंत में पैनल चर्चा और कार्यशाला का समापन सत्र हुआ।
जल संशासन मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत अब पूरे देश में स्वाइल एंड वाटर कंजर्वेशन पर काम हो रहे हैं। मनेरगा में अब भूतल जल सरंक्षण की दिशा में भी अब काम किया जाएगा।
दूसरे सत्र में डॉ एसके भारतार्या, डॉ सुनेश शर्मा, अल्बर्ट नगुउले, वैभव गोसाई, डॉ जी शर्मा और साइकत पाल ने शोध कार्य पेश किये। अंत में पैनल चर्चा और कार्यशाला का समापन सत्र हुआ।
जल संशासन मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत अब पूरे देश में स्वाइल एंड वाटर कंजर्वेशन पर काम हो रहे हैं। मनेरगा में अब भूतल जल सरंक्षण की दिशा में भी अब काम किया जाएगा।