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हिमाचल हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: पर्यटन विकास निगम के तृतीय श्रेणी कर्मियों को मिलेगी 3200 ग्रेड पे
Thu, 01 Oct 2026 07:44 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 01 Oct 2026 07:44 PM IST
सार
अदालत ने निगम की ओर से कर्मचारियों को ग्रेड पे न देने के रवैये को मनमाना और भेदभावपूर्ण करार दिया है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कृपाल सिंह और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में पर्यटन विकास निगम को अपने तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को 3200 प्रति माह ग्रेड पे देने का आदेश दिया है। अदालत ने निगम की ओर से कर्मचारियों को ग्रेड पे न देने के रवैये को मनमाना और भेदभावपूर्ण करार दिया है। न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कृपाल सिंह और अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया।
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कोर्ट ने कहा कि जब इन कर्मचारियों को पहले ही तृतीय श्रेणी में वर्गीकृत किया जा चुका है, तो सिर्फ नोटिफिकेशन में नाम न होने के बहाने उन्हें लाभ से वंचित करना पूरी तरह अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता निगम में कैप्टन, वेटर, फ्लोर असिस्टेंट, सुरक्षा पर्यवेक्षक और कॉमी जैसी विभिन्न श्रेणियों में कार्यरत कर्मचारी हैं।
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निगम के निदेशक मंडल ने 1999 में ही इन श्रेणियों को 3120-5160 के वेतनमान के साथ तृतीय श्रेणी में वर्गीकृत किया था। कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें केवल 1900 ग्रेड पे दिया जा रहा था, जबकि निगम के अन्य तृतीय श्रेणी कर्मचारियों (जैसे क्लर्क) को सरकार के सितंबर 2012 के नोटिफिकेशन के तहत 3200 ग्रेड पे का लाभ मिल रहा था।
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कई बार प्रबंधन से गुहार लगाने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो कर्मचारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। पर्यटन विकास निगम ने कोर्ट में तर्क दिया था कि वह कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत है और उसे मुनाफे के आधार पर काम करना होता है। सरकार की 2012 की नोटिफिकेशन उस पर स्वतः लागू नहीं होती। चूंकि याचिकाकर्ताओं के पदों का नाम उस नोटिफिकेशन में नहीं था, इसलिए उन्हें इसका लाभ नहीं दिया गया।