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रेडिमेड कपड़ों पर जीएसटी लगाने से कारोबारियों खफा
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रेडिमेड कपड़ों पर जीएसटी लगाने से कारोबारियों खफा
अगले हफ्ते सरकार से मिलेंगे व्यापारी
कारोबारी बोले, 65 साल में नहीं लगा कोई टैक्स, अब महंगे हो जाएंगे कपड़े
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जीएसटी परिषद के फैसले के अनुसार राजधानी में भी पहली जनवरी से सिले सिलाए कपड़े महंगे हो जाएंगे। कोरोना की मार के बीच अब खरीदारों को 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ सकता है। इससे कारोबार पर भी असर पड़ने की संभावना है।
राजधानी के कारोबारियों ने जीएसटी परिषद के फैसले पर ऐतराज जता दिया है। कारोबारियों का कहना है कि कपड़ा आम आदमी की मूलभूत जरूरत है। इस पर टैक्स या जीएसटी नहीं लगना चाहिए। बीते 65 साल में कपड़े पर कभी टैक्स नहीं लगाया गया। बीती सरकारों ने वैट तक नहीं लगाया। लेकिन अब जीएसटी परिषद ने अचानक जीएसटी लगाने का फैसला लिया है जिससे कपड़े महंगे हो सकते हैं। कारोबार पहले ही कोरोना के चलते घाटे में चल रहा है। शहर के कारोबारी इस बारे में शिमला व्यापार मंडल के साथ बैठक भी कर चुके हैं। इनका कहना है कि इस बारे में कारोबारियों का पक्ष सरकार के समक्ष रखा जाए। जीएसटी परिषद से मिलकर भी इस बारे में बात की जाए। शिमला व्यापार मंडल अगले हफते शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिलने जा रहा है। इसमें रेडिमेड कपड़ों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की जाएगी।
सरकार के समक्ष रखेंगे बात : अध्यक्ष
शिमला व्यापार मंडल अध्यक्ष हरजीत मंगा ने कहा कि कारोबारी जीएसटी लगाए जाने के फैसले के खिलाफ है। इस बारे में बैठक भी हो चुकी है। अगले हफते शहरी विकास मंत्री और जीएसटी परिषद के समक्ष कारोबारियों की मांग उठाई जाएगी। शिमला व्यापार मंडल कारोबारियों के साथ खड़ा है।
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अब महंगे हो सकते हैं कपड़े : कुकरेजा
शहर के कपड़ा कारोबारी अशोक कुकरेजा का कहना है कि पहले कपड़ों पर जीएसटी नहीं था। लेकिन अब पहली जनवरी से जीएसटी देना होगा। इससे कपड़े महंगे हो सकते हैं जिसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा। सरकार को इस फैसले पर विचार करना होगा।
जीएसटी लगाने का फैसला गलत : अग्रवाल
कपड़ा कारोबारी रमेश अग्रवाल का कहना है कि कपड़ा आम आदमी की जरूरत है और इस पर जीएसटी लगाना गलत है। बीते 65 साल में कपड़े को टैैक्स के दायरे से बाहर रखा गया लेकिन अब जीएसटी लगाया जा रहा है। कारोबारी इसके खिलाफ है।
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अगले हफ्ते सरकार से मिलेंगे व्यापारी
कारोबारी बोले, 65 साल में नहीं लगा कोई टैक्स, अब महंगे हो जाएंगे कपड़े
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जीएसटी परिषद के फैसले के अनुसार राजधानी में भी पहली जनवरी से सिले सिलाए कपड़े महंगे हो जाएंगे। कोरोना की मार के बीच अब खरीदारों को 12 फीसदी जीएसटी देना पड़ सकता है। इससे कारोबार पर भी असर पड़ने की संभावना है।
राजधानी के कारोबारियों ने जीएसटी परिषद के फैसले पर ऐतराज जता दिया है। कारोबारियों का कहना है कि कपड़ा आम आदमी की मूलभूत जरूरत है। इस पर टैक्स या जीएसटी नहीं लगना चाहिए। बीते 65 साल में कपड़े पर कभी टैक्स नहीं लगाया गया। बीती सरकारों ने वैट तक नहीं लगाया। लेकिन अब जीएसटी परिषद ने अचानक जीएसटी लगाने का फैसला लिया है जिससे कपड़े महंगे हो सकते हैं। कारोबार पहले ही कोरोना के चलते घाटे में चल रहा है। शहर के कारोबारी इस बारे में शिमला व्यापार मंडल के साथ बैठक भी कर चुके हैं। इनका कहना है कि इस बारे में कारोबारियों का पक्ष सरकार के समक्ष रखा जाए। जीएसटी परिषद से मिलकर भी इस बारे में बात की जाए। शिमला व्यापार मंडल अगले हफते शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिलने जा रहा है। इसमें रेडिमेड कपड़ों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की जाएगी।
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सरकार के समक्ष रखेंगे बात : अध्यक्ष
शिमला व्यापार मंडल अध्यक्ष हरजीत मंगा ने कहा कि कारोबारी जीएसटी लगाए जाने के फैसले के खिलाफ है। इस बारे में बैठक भी हो चुकी है। अगले हफते शहरी विकास मंत्री और जीएसटी परिषद के समक्ष कारोबारियों की मांग उठाई जाएगी। शिमला व्यापार मंडल कारोबारियों के साथ खड़ा है।
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अब महंगे हो सकते हैं कपड़े : कुकरेजा
शहर के कपड़ा कारोबारी अशोक कुकरेजा का कहना है कि पहले कपड़ों पर जीएसटी नहीं था। लेकिन अब पहली जनवरी से जीएसटी देना होगा। इससे कपड़े महंगे हो सकते हैं जिसका सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा। सरकार को इस फैसले पर विचार करना होगा।
जीएसटी लगाने का फैसला गलत : अग्रवाल
कपड़ा कारोबारी रमेश अग्रवाल का कहना है कि कपड़ा आम आदमी की जरूरत है और इस पर जीएसटी लगाना गलत है। बीते 65 साल में कपड़े को टैैक्स के दायरे से बाहर रखा गया लेकिन अब जीएसटी लगाया जा रहा है। कारोबारी इसके खिलाफ है।