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शिव बावड़ी हादसा: अपनों को याद कर आज भी नम हो जाती हैं परिजनों की आंखें, पहली बरसी पर दी गई श्रद्धांजलि

Wed, 14 Aug 2024 06:12 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 14 Aug 2024 06:12 PM IST
सार

एक साल पहले समरहिल के शिव बावड़ी में 14 अगस्त को हुए हादसे में 20 लोग हमेशा के लिए दब गए थे। हादसे की पहली बरसी पर पीड़ित परिवारों और लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

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Shimla Summerhill Shiv Bawdi Accident Tribute Paid On The First Anniversary
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल श्रद्धांजलि देते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

समरहिल के शिव बावड़ी में एक साल पहले 14 अगस्त को हुए हादसे को याद कर आज भी अपनों को खो देने वाले परिजनों की आंखें नम हो जाती हैं। भूस्खलन के कारण दो सड़कों और रेलवे ट्रैक का मलबा शिव बावड़ी मंदिर पर आ गिरा था। मलबे के नीचे 20 लोग हमेशा के लिए दब गए थे। हादसे की पहली बरसी पर उनके परिजन और लोग श्रद्धांजलि देने के लिए मंदिर में एकत्रित हुए। हर व्यक्ति की आंखों में उस काली सुबह की यादें आज भी ताजा थीं। एक पिता की आंखों के सामने उसका जवान बेटा उस हादसे में मौत की आगोश में समा गया था, वे अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। एक विधवा अपने पति की तस्वीर के सामने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी थी। उसकी आंखों से आंसू बहने से नहीं रुक रहे थे। उसकी बेटी जिसने अपने पिता को मुखाग्नि दी थी, अब अपनी मां को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रही थी। पिता को याद में बेटी की आंखें भी नम थीं।

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शोकसभा में समरहिल के निवासी, पीड़ितों के परिजन, दोस्त, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, मेयर शिमला सुरिंद्र चौहान, एसडीएम शहरी भानु गुप्ता और अन्य अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ संवेदनाएं व्यक्त कीं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गत वर्ष भारी बारिश और भूस्खलन के कारण आई प्राकृतिक आपदा में प्राचीन मंदिर शिव बावड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसमें 20 श्रद्धालु काल का ग्रास बन गए थे, जो सुबह पूजा-अर्चना करने के लिए मंदिर में आए थे। कहा आपदा में पूरे प्रदेश में करीब 551 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी तथा करीब 12 हजार करोड़ का आर्थिक नुकसान प्रदेश को हुआ था।

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स्मारक के आसपास अपनों की याद में लगाए पौधे
शिव बावड़ी मंदिर में एक स्मारक बनाया गया है, जिस पर जान गंवाने वाले लोगों के नाम अंकित किए गए हैं। परिवारजनों ने अपने प्रियजनों की याद में स्मारक पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद मंदिर के आसपास देवदार और बान के पौधे लगाए गए।

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