अश्विनी खड्ड का मामला: दो महीनों में शिमला की प्लास्टिक नदी के सफाई का आदेश
हिमाचल प्रदेश के शिमला में महत्वपूर्ण पेयजल स्रोत अश्विनी खड्ड के प्लास्टिक कचरे वाली नदी में तब्दील हो जाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
पीठ ने अगली सुनवाई में शिमला नगर निगम के कमिश्नर और सोलन नगर पालिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को तलब किया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वत: संज्ञान मामले में यह आदेश दिया है।
पीठ ने कहा कि अश्विनी खड्ड से जुड़ने वाले छोटे-बड़े सभी नालों में ऐसे जाल लगाए जाने चाहिए जो ठोस कचरा समेत प्लास्टिक कचरे को खड्ड पहुंचने से पहले ही रोक लें।
पीठ ने फटकार लगाते हुए ये कहा
एनजीटी ने कहा कि शिमला नगर निगम और सोलन नगर पालिका अश्विनी खड्ड की पूरी तरह सफाई करने के बाद आदेश अनुपालन की रिपोर्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा करें। एनजीटी का यह आदेश हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) की तरफ से ट्रिब्यूनल में दाखिल हलफनामा पर आया है।
पीठ ने फटकार लगाते हुए कहा कि इस मामले में उनके पास चार महीने देरी से रिपोर्ट दाखिल की गई। पीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले में अगले वर्ष 28 फरवरी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। वहीं मामले की अगली सुनवाई आगामी 11 मार्च को होगी।