शिमला रेप केस: सीएम ने सीबीआई जांच को कह दिया था तो किसके इशारे पर किया गया टॉर्चर
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आखिर गुड़िया मामला सीबीआई के सुपुर्द करने के एलान के बाद भी पुलिस हिरासत में बंद आरोपियों से सख्ती से क्यों पूछताछ करती रही? क्या सिर्फ पुलिस इन पांच आरोपियों से गुड़िया का गुनाह जबरदस्ती कबूल करवाना चाह रही थी?
अगर वह कबूल करवा भी लेते तो सीबीआई जांच में सारे आरोपी बेदाग निकल जाते और अंत में ऐसा हुआ भी। यह जानते हुए भी कि मामला सीबीआई को जा रहा है तो गुड़िया प्रकरण में इतनी दिलचस्पी क्यों ली जा रही थी।
लेकिन जांच में अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इसकी असल वजह क्या थी। क्या पुलिस के अफसर किसी के दबाव में काम कर रहे थे या फिर माजरा ही कुछ और था। इन सवालों के साफ और स्पष्ट जवाब आज भी आम जनता को नहीं मिल पाए हैं।
इस केस में उल्टा हुआ
यह केस पूरी तरह से पहेली बन चुका है। मामला बढ़ने पर 10 जुलाई को तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को जांच से हटाया और आईजी जहूर एच जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन हुआ। 12 जुलाई को सीएम के फेसबुक पेज पर पांच संदिग्धों के फोटो वायरल हुए। 15 जुलाई को भारी जनाक्रोश के दबाव में प्रदेश सरकार ने पीएम को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की।
बावजूद इसके पुलिस संदिग्ध आरोपियों से पूछताछ करती रही और 18 जुलाई को सूरज की हवालात में मौत हो गई। मौत की खबर पता चलने पर 18 जुलाई को ही सरकार ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए आवेदन किया। 19 जुलाई को प्रदेश उच्च न्यायालय में सीबीआई को जांच सौंपी और 23 जुलाई को सीबीआई ने दो मामले दर्ज किए।
बता दें कि 15 जुलाई को सीबीआई जांच करवाने का राज्य सरकार ने एलान कर दिया था। सीबीआई को केस देने के एलान के बाद शिमला से गए एसआईटी के सदस्य 16 जुलाई को लौट आए थे। वहां स्थानीय पुलिस अफसर ही मौजूद थे और वही आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रहे थे। अमूमन इस तरह के मामले में पुलिस जांच से अपने हाथ पीछे खींच लेती है, जब उन्हें पता हो कि अब मामले की जांच सीबीआई करेगी। लेकिन इस केस में उल्टा हुआ।
क्या है हकीकत
एसआईटी के कुछ सदस्य लगातार आरोपियों से पूछताछ करते रहे और लॉकअप में एक आरोपी सूरज की मौत ने सबको चौंका दिया। गुस्साई भीड़ ने थाना फूंक दिया। इससे केस और भी ज्यादा उलझ गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आम जनता का संदेह और पक्का हो गया।
सीबीआई जांच में भी संबंधित पुलिस अफसर गिरफ्तार किए गए और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है। लेकिन इन सबके पीछे पुलिस क्या सिर्फ अपनी खाल बचाने के लिए संदिग्ध आरोपियों से डंडे के जोर पर अपराध कबूल करवाना चाहती थी या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश है?
इसका खुलासा अब तक सीबीआई भी नहीं कर पाई है। हकीकत क्या है। सभी अंधेरे में तीर चला रहे हैं। कई तरह की चर्चाएं एक बार गर्म हो गई हैं और सबकी नजरें सीबीआई के अगले कदम पर टिक गई हैं।