शिमला रेप केस: CBI ने आठ पुलिसवालों के खिलाफ पेश की 600 पन्नों की चार्जशीट
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बहुचर्चित कोटखाई गुडि़या प्रकरण से जुडे़ लॉकअप हत्या मामले में सीबीआई ने निलंबित आईजी जहूर एच. जैदी, डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस वालों के खिलाफ शनिवार को कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। नौवें आरोपी निलंबित एसपी डीडब्ल्यू नेगी के खिलाफ अनुपूरक चालान पेश किया जाएगा।
आरोपियों पर अब हत्या, प्रताड़ना और आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा चलेगा। कोटखाई थाने में गुडि़या दुराचार और हत्या मामले में पुलिस की ओर से बनाए गए आरोपी नेपाली सूरज सिंह की 18 जुलाई की रात लॉकअप में हत्या हो गई थी।
इसी केस में शनिवार को सीबीआई ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला रणजीत सिंह की अदालत में आईपीसी की धारा 302, 330, 331, 348, 323, 326, 218, 195, 196, 201 और 120 बी धाराओं में चालान पेश किया। यह चालान कई बंडलों में करीब 600 पृष्ठों का है।
उल्लेखनीय है कि पुलिस वालों को सीबीआई ने 29 अगस्त को गिरफ्तार किया था। गुडि़या मामले की जांच के लिए पुलिस की एसआईटी का गठन किया गया था। इसकी निगरानी तत्कालीन आईजी जैदी को दी गई थी।
चालान की प्रति का इंतजार करते रहे आरोपी
ये हैं आरोपी
तत्कालीन आईजी दक्षिणी रेंज शिमला जहूर एच. जैदी
ठियोग के तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी
कोटखाई पुलिस थाने के पूर्व एसएचओ राजेंद्र सिंह
पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एएसआई दीप चंद
एचएचसी रहे सूरत सिंह और मोहन लाल
हेड कांस्टेबल रफीक अली, कांस्टेबल रंजीत स्ट्रेटा
शिमला बार काउंसिल ने आरोपी पुलिस वालों का केस लड़ने के लिए वकीलों को अनुमति नहीं दी है। लिहाजा, आरोपी अधिकारियों की ओर से कोई भी वकील कोर्ट में पेश नहीं हो रहे। शनिवार दोपहर बाद तक चालान की प्रति लेने के लिए आरोपी इंतजार करते रहे। साढे़ चार बजे तक भी उन्हें इसकी प्रति नहीं मिल र्पाई।
14 दिन की न्यायिक हिरासत पर भेजे आरोपी
सीजेएम शिमला रणजीत सिंह की अदालत में शनिवार को निलंबित आईजी जहूर एच जैदी, पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी समेत नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पेश किया गया। इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत पर भेजा गया है। जहां आईजी समेत आठों पुलिस वाले कंडा जेल भेजे गए, वहीं डीडब्ल्यू नेगी को कैथू कारागार में रखा गया है।
पुलिस वालों पर सूरज की हत्या का आरोप
सीबीआई के चालान में आरोप है कि कोटखाई थाने के लॉकअप में सूरज सिंह की हत्या इस मामले के दूसरे आरोपी रहे राजू ने नहीं की। यह हत्या पुलिस वालों ने ही पूछताछ के दौरान की। इस हत्या के लिए थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह समेत अन्य पुलिस वालों को जिम्मेवार ठहराया गया है।
ये पूछताछ डीएसपी मनोज जोशी की निगरानी में एसआईटी के सदस्य कर रहे थे। इस एसआईटी के प्रमुख जहूर एच जैदी थे। हत्या के बाद देर रात को पहले डीएसपी जोशी शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी के घर आए।
उसके बाद एसपी नेगी और डीएसपी जोशी आईजी जहूर एच जैदी के पास गए। जैदी को पूरी बात बताने के बाद पुलिस वालों ने गुडि़या मामले के आरोपी राजू पर ही हत्या का केस बनाने का फैसला लिया। इसके बाद झूठा मुकदमा बनाया गया और इस मामले में लीपापोती की गई।
क्या है गुडि़या मामला
छह जुलाई को कोटखाई के दांदी जंगल में हलाइला गांव के पास दसवीं की छात्रा गुडि़या (काल्पनिक नाम) की लाश निर्वस्त्र अवस्था में गिरी पड़ी थी। गुडि़या चार जुलाई को यहां एक स्कूल से जंगल के रास्ते अपने घर के लिए निकली, जिसके बाद पांच जुलाई तक जब वह घर नहीं पहुंची तो उसके परिजन उसे जंगल में खोजते रहे।
उन्हें लगा कि हो न हो, जंगल में भालू या चीते न उस पर हमला बोला हो। जब परिजनों को छह जुलाई को उसकी लाश मिली तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद उसके साथ दुराचार अथवा गैंगरेप और हत्या होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने कोटखाई थाने में उसकी हत्या और उससे दुराचार होने का मामला दर्ज किया।
जनता के आक्रोश के बाद हिमाचल सरकार ने आईजी जैदी के नेतृत्व में पुलिस एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने कुछ दिन बाद ही छह आरोपियों को पकड़कर ये दावा किया कि इन्हीं ने इस अपराध के अंजाम दिया। जनता ने पुलिस की इस जांच पर संदेह जताते हुए सड़कोें पर उतरकर प्रदर्शन किए।
18 जुलाई की रात को कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत में आरोपी सूरज सिंह की हत्या की गई तो गुस्साए लोगों ने इस थाने को ही फूंक डाला। इसके बाद हिमाचल हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इस मामले की छानबीन सीबीआई को दी। सीबीआई ने इस मामले की जांच जुलाई अंत में शुरू की।